“डोनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रस्तावित अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों को फिलहाल रोक दिया है। भारत और चीन समेत कई देशों को राहत मिली है।“
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने और नए प्रतिबंध लागू करने की योजना पर फिलहाल रोक लगा दी है। 16 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यकारी आदेश के बाद भारत और चीन समेत रूस से ऊर्जा आयात करने वाले कई देशों को राहत मिली है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर कड़े आर्थिक कदम उठाने की तैयारी की जा रही थी।
व्हाइट हाउस के आदेश में कहा गया है कि संबंधित कानून के तहत प्रस्तावित शुल्क और प्रतिबंधों से छूट देना फिलहाल अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इसके लिए कांग्रेस को आवश्यक प्रमाण-पत्र और स्पष्टीकरण सौंपे जाने की बात भी कही गई है। हालांकि, यह फैसला भविष्य में दोबारा कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह समाप्त नहीं करता। <Cite refs={[“turn141673search0”]}/>
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का था प्रावधान
अमेरिका में सितंबर 2026 में लागू किए गए लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट के तहत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान था।
इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता था। इसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार से होने वाली कमाई पर दबाव बनाना और यूक्रेन युद्ध को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाना था।
हालांकि, ट्रंप के नए आदेश में इन शुल्क प्रावधानों के लागू होने पर फिलहाल छूट दे दी गई है। इस कारण प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ का तत्काल खतरा टल गया है।
भारत और चीन समेत पांच देशों को राहत
रिपोर्ट के मुताबिक, रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। इन देशों पर प्रस्तावित अमेरिकी शुल्क का असर पड़ सकता था।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में रूस से तेल खरीदने के कारण भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की आशंका व्यापारिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण थी।
ट्रंप के आदेश से फिलहाल इस नए शुल्क प्रावधान पर राहत मिली है। हालांकि, इससे भारत के अमेरिका के साथ व्यापार पर लागू अन्य शुल्क स्वतः समाप्त नहीं हो जाते। नए आदेश का दायरा ग्राहम कानून के संबंधित प्रावधानों तक सीमित है।
टैरिफ भारत में खरीदे जाने वाले रूसी तेल पर नहीं था
इस मामले में यह समझना जरूरी है कि प्रस्तावित 100 प्रतिशत टैरिफ का मतलब भारत द्वारा रूस से खरीदे जाने वाले तेल पर सीधे अमेरिकी शुल्क लगना नहीं था। कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों से अमेरिका में आयात होने वाले सामान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था थी।
इसका संभावित असर भारतीय निर्यातकों पर पड़ सकता था, क्योंकि अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की लागत बढ़ने की आशंका रहती। अब नए आदेश के कारण ग्राहम कानून के तहत संबंधित अतिरिक्त शुल्क फिलहाल लागू नहीं होंगे।
राष्ट्रीय हित का हवाला, भविष्य में बदल सकता है फैसला
ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश में कहा कि ग्राहम कानून के तहत प्रस्तावित शुल्क और प्रतिबंधों से छूट देना फिलहाल अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। आदेश के अनुसार, यह छूट तब तक जारी रह सकती है, जब तक राष्ट्रपति या अधिकृत अधिकारी यह तय नहीं कर लेते कि आगे कार्रवाई करना उचित होगा।
इसका अर्थ है कि भारत और अन्य प्रभावित देशों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन इसे स्थायी छूट नहीं माना जा सकता। अमेरिकी प्रशासन परिस्थितियों की निगरानी जारी रखेगा और जरूरत पड़ने पर आगे कदम उठा सकता है।
रूस-अमेरिका संबंधों के बीच आया फैसला
यह आदेश यूक्रेन युद्ध और रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की अमेरिकी नीति के बीच आया है। नए प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र और उससे जुड़े कारोबार पर दबाव बढ़ाना था। दूसरी ओर, ऊर्जा की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति को लेकर भी अमेरिका के सामने चुनौतियां हैं।
ट्रंप के ताजा फैसले से रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क फिलहाल टल गए हैं। भारत के लिए यह राहत अमेरिकी बाजार में निर्यात की संभावित लागत से जुड़ी चिंता को कम कर सकती है। हालांकि, आगे की व्यापार नीति और प्रतिबंधों में बदलाव पर नजर रखना जरूरी होगा।
ट्रंप के आदेश से भारत समेत रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों को ग्राहम कानून के तहत प्रस्तावित अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ से फिलहाल राहत मिली है। यह छूट अस्थायी रूप से लागू है और भविष्य में अमेरिकी प्रशासन इसे बदल सकता है।
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