यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन और ओवैसी की एआईएमआईएम के प्रस्ताव को लेकर सियासी चर्चा तेज। कांग्रेस की 200 से अधिक सीटों की कथित मांग और सीट बंटवारे पर नजर।
- कांग्रेस ने इसीलिए समाजवादी पार्टी से 200+ सीटों की कर दी है डिमांड
- खड़गे-मसूद में संसद परिसर मे ही तय हो गया था कि ओवैसी को घुसने नहीं देना
अभयानंद शुक्ल
लखनऊ। खुद को मुस्लिम मतों का पहला हकदार मानने वाली कांग्रेस पार्टी को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं अखिलेश यादव का दिल पिघल न जाए और वे असदुद्दीन ओवैसी से गठबंधन कर लें। और इसी कारण सपा पर दबाव बढ़ाने के लिए कांग्रेस की सीटों की डिमांड बढ़ती जा रही है। चूंकि कांग्रेस को लगता है कि ओवैसी के साथ आने से उसकी सीटें तो घटेंगी ही, साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम मतों का पहला हकदार होने का उसका सपना भी पूरा नहीं हो पाएगा। उधर ओवैसी हैं कि तय मियाद पूरी होने के बाद भी अखिलेश यादव को आफर पर आफर दिए जा रहे हैं। उधर सपा के सूत्रों की खबर है कि पार्टी सुप्रीमो अखिलेश कांग्रेस के दबाव को देखते हुए अब ओवैसी के साथ जाने पर भी सोच रहे हैं। पर, इसमें दिक्कत ये है कि जो डर कांग्रेस को सता रहा है, वही सपा को भी है। पर इंडी गठबंधन में सीटों के बंटवारे का मामला अभी ठंडा है, ये साफ साफ दिख रहा है। शायद इसीलिए निचले स्तर के नेताओं के वार-पलटवार के बावजूद सपा और कांग्रेस का आलाकमान मुंह पर ताला लगा कर बैठा है।
खबर है कि कांग्रेस ने दबाव की रणनीति के तहत अपनी डिमांड डेढ़ सौ सीटों से बढ़ाकर 200 प्लस तक कर दी है। अभी तक डेढ़ सौ सीटों की मांग करने वाली कांग्रेस ने अचानक ही अपना स्टैंड बदला है। इसके पीछे जो कारण बताया जा रहा है, वह चौंकाने वाला है। खबर है कि असदुद्दीन ओवैसी के एकतरफा प्यार से अखिलेश भी पिघल रहे हैं। इससे कांग्रेस बेचैन है। फिलहाल सपा और कांग्रेस में वार-पलटवार जारी है। इसके अलावा स्वामी प्रसाद मौर्य को एंट्री देकर कांग्रेस ने पहले ही भीड़ बढ़ा ली है। सपा और कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन होगा, ये अंतिम सच है, लेकिन ओवैसी वाले पेंच ने मामला फंसा दिया है।
खबर है कि सपा नहीं चाहती कि ओवैसी को सीधे मनाकर मुसलमानों की नाराजगी मोल ली जाए। क्योंकि दबी जुबान से इंडी वाले भी ये मानते हैं कि ओवैसी मुस्लिमों में पहचान बना चुके हैं। कार्यकर्ताओं का नेटवर्क भी बढ़ा है, और उनके फॉलोअर्स भी बढ़े हैं। ओवैसी मुस्लिमों को ये भी समझाने में कामयाब होते जा रहे हैं कि मुसलमानों ने सपा और कांग्रेस को वोट तो दिया लेकिन मिला कुछ नहीं। इसी कारण इंडी वाले ओवैसी को नाराज नहीं करना चाहते। क्योंकि इससे मुस्लिमों में नकारात्मक संदेश जाने का खतरा है। वे चाहते हैं किसी भी तरह ओवैसी परेशान होकर नाराज फूफा की तरह खुद ही कह दें कि मैं गठबंधन नहीं करूंगा।
उधर कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 100 से डेढ़ सौ के बाद अपनी सीटों की डिमांड बढ़ाकर 200+ कर दी है। उनका कहना है कि हम लड़ेंगे नहीं तो जीतेंगे कैसे। हालांकि जानकार इसे दोनों दलों की नूराकुश्ती और यूपी में ओवैसी को रोकने की रणनीति बता रहे हैं। खबर यही है कि दोनों ओवैसी को ये मैसेज देना चाहते हैं कि भाई इंडी गठबंधन में गुंजाइश नहीं है, तुम अपने रास्ते ही रहो। उधर ओवैसी हैं कि वे लगातार अपना एक तरफा प्यार जताते हुए गठबंधन का ऑफर पर ऑफर दिए जा रहे हैं। ओवैसी ने गठबंधन के लिए 2 अक्टूबर की मियाद तय की थी। और कहा था कि अगर सपा से गठबंधन नहीं हुआ तो किसी और से गठबंधन कर चुनाव लड़ेंगे, पर मियाद बीतने के बाद भी ओवैसी ने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। वे लगातार ऑफर दे रहे हैं कि सपा मुझसे गठबंधन कर ले क्योंकि भाजपा को हराना अकेले उसके बस की बात नहीं है। फिर वे धमकी भी देते हैं कि मेरे आफर को मेरी कमजोरी न समझा जाए। हम तो बस योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्व वाली सरकार को रोकना चाहते हैं। और ये सपा-कांग्रेस अकेले नहीं कर पाएंगे। वे धमकी देते हैं कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो इंडी गठबंधन का हाल यूपी में भी बिहार जैसा हो जाएगा, जहां उनके चलते इंडी गठबंधन कई सीटों पर चुनाव हार गया था। खैर, अभी बीते मंगलवार 13 अक्टूबर को ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता सैयद जव्वाद ने भी सपा को दीपावली आफर देकर फिर साथ चुनाव लड़ने का प्रस्ताव देकर फिर माहौल गर्म कर दिया है।
हाल ही में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष बदलने के बाद लगा था कि सपा और कांग्रेस में कलह बढ़ेगी लेकिन थोड़ी बहुत तल्खी के बाद अब वह मामला डाइल्यूट हो गया है। नेताओं की तंज बयानी भी थम गई है। उधर ओवैसी कहते हैं कि अगर ब्राह्मणों का कोई नेता है, क्षत्रियों का कोई नेता है, पिछड़ों का कोई नेता है, दलितों का कोई नेता है, हिंदुओं का कोई नेता है, तो मुस्लिमों का क्यों नहीं हो सकता है। ओवैसी ने सपा-कांग्रेस को चेताते हुए कहा है कि मुस्लिम किसी की बपौती नहीं है। ये समझना भूल होगी कि मुस्लिम उन्हें ही वोट करेंगे। दरअसल ओवैसी मुस्लिमों के नुमाइंदे के रूप में इंडी गठबंधन से जुड़ना चाहते हैं, और ये बात न तो सपा को मंजूर है और न ही कांग्रेस को। इस बारे में ओवैसी की पार्टी के प्रदेश संयुक्त सचिव सुनील कुमार यादव ने कहा कि हमसे गठबंधन करके सपा ही फायदे में रहेगी। क्योंकि ओवैसी जी नहीं चाहते हैं कि भाजपा विरोधी मतों का बंटवारा हो और उसका फायदा भाजपा को मिले। अब अगर सपा को अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारनी है तो अलग बात है। जबकि सपा के प्रदेश सचिव आरके मिश्रा का कहना है कि गठबंधन किससे होगा, ये तो पार्टी ही तय करेगी लेकिन यूपी में सपा की लहर चल रही है, ये अंतिम सच है। उनका दावा है कि सपा अकेले चुनाव लड़ने में सक्षम है, पर कोई और साथ आता है, तो अच्छी बात है। वैसे वरिष्ठ सपा नेता रविदास मेहरोत्रा ने ये कहकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है कि कांग्रेस से हमारा गठबंधन लोकसभा तक के लिए था, विधानसभा चुनाव के लिए अभी बात चल रही है।
देश-दुनिया की हर बड़ी खबर, सबसे पहले और सबसे सटीक…
राजनीति, चुनाव, मनोरंजन, खेल और देश-प्रदेश की हर महत्वपूर्ण हलचल से अपडेट रहने के लिए जुड़े रहिए यूपी 24 नेटवर्क न्यूज़के साथ। सत्ता के गलियारों से लेकर आम जनता के मुद्दों तक, चुनावी बयानबाज़ी से लेकर खास पड़ताल और एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स तक—हम पहुंचाते हैं आपके लिए खबरों का सटीक विश्लेषण और हर खबर की पूरी जानकारी।
खबर वही, जो आप तक पहुंचे सबसे पहले और भरोसे के साथ।
यूपी 24 नेटवर्क न्यूज़— आपकी आवाज़, आपकी खबर, आपका भरोसा..
