फिरोजाबाद में बिना वैध लाइसेंस दवाओं का भंडारण और बिक्री करने के मामले में आगरा की अदालत ने दोषी को 3 साल की जेल और 1.30 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। कार्रवाई तत्कालीन औषधि निरीक्षक पूरन चंद ने की थी।
मुरादाबाद/आगरा। बिना वैध लाइसेंस दवाओं का भंडारण और बिक्री करने के मामले में आगरा की अदालत ने दोषी को तीन साल के कारावास और कुल 1 लाख 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला फिरोजाबाद में वर्ष 2011 में की गई कार्रवाई से जुड़ा है। उस समय औषधि निरीक्षक रहे और वर्तमान में मुरादाबाद मंडल में सहायक आयुक्त, औषधि के पद पर तैनात पूरन चंद की कार्रवाई के करीब 15 साल बाद अदालत का फैसला आया है।
दुकान के निरीक्षण में सामने आई थी अनियमितता
प्रकरण के अनुसार, 12 जुलाई 2011 को तत्कालीन औषधि निरीक्षक पूरन चंद ने फिरोजाबाद के थाना दक्षिण क्षेत्र में माता मंदिर के पास, मोहल्ला कोटला वाली गली स्थित दिनेश कुमार पुत्र रामनाथ की दुकान का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान दुकान पर दवाओं का भंडारण और बिक्री बिना वैध औषधि विक्रय लाइसेंस के किए जाने की बात सामने आई। दुकानदार दवाओं से संबंधित बिल और रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं कर सका।
इसके बाद मामले में मुकदमा अपराध संख्या 305/2011 दर्ज किया गया और प्रकरण सत्र वाद संख्या 10/2012 के तहत न्यायालय पहुंचा।
विशेष न्यायालय में हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई आगरा के अपर सत्र न्यायाधीश-16 एवं विशेष न्यायाधीश (औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम) की अदालत में हुई। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक संत प्रसाद सिन्हा ने पैरवी की।
सुनवाई के दौरान पूरन चंद ने वादी के रूप में गवाही दी। इसके अलावा विवेचक उपनिरीक्षक विक्रम सिंह तोमर और टीम के सदस्य रहे तत्कालीन डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेंद्र सिंह ने भी न्यायालय में अपने बयान दर्ज कराए।
अदालत ने सुनाई तीन धाराओं में सजा
लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद 14 अक्टूबर 2026 को अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई।
- औषधि अधिनियम की धारा 18(c)/27(b)(ii): तीन साल का कारावास और एक लाख रुपये जुर्माना।
- औषधि अधिनियम की धारा 18-A/28: एक साल का कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना।
- भारतीय दंड संहिता की धारा 419: तीन साल का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना।
इस तरह कुल जुर्माने की राशि 1 लाख 30 हजार रुपये हुई। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
15 साल बाद आया फैसला
यह मामला औषधि विक्रय से जुड़े नियमों के उल्लंघन और बिना वैध लाइसेंस दवाओं की बिक्री के आरोपों से संबंधित था। वर्ष 2011 में शुरू हुई कार्रवाई पर अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया। विभागीय स्तर पर इसे औषधि कानूनों के पालन और अवैध दवा कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई के महत्वपूर्ण परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।
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