लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी की बाढ़ से प्रभावित इलाकों में अभी पूरी तरह राहत नहीं मिली है। नदी के बढ़ते जलस्तर, रिहायशी क्षेत्रों में जलभराव और तटबंधों की स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। 9 अक्टूबर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गोमती नगर विस्तार में पुलिस मुख्यालय के सामने बने तटबंध के एक हिस्से की मिट्टी धंसने और बड़ी दरारें दिखाई देने की खबर सामने आई है। दूसरी ओर, नदी के ऊपरी इलाकों में जलस्तर घटने से शहर में अगले 24 से 48 घंटों में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7 में ओरेंज अपार्टमेंट के सामने तटबंध की मिट्टी नदी की ओर धंस गई है। इससे आसपास के निचले इलाकों में पानी पहुंचने की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, तटबंध टूटने की पुष्टि नहीं हुई है। इसकी वास्तविक मजबूती और जोखिम का आकलन संबंधित विभागों की तकनीकी जांच से ही स्पष्ट होगा।
गोमती नदी का ताजा जलस्तर कितना है?
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार शाम तक लखनऊ में गोमती नदी के अलग-अलग निगरानी केंद्रों पर जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
हनुमान सेतु पर शाम 6 बजे जलस्तर करीब 107.30 मीटर दर्ज किया गया, जबकि गौघाट पर यह 108.60 मीटर और गोमती बैराज पर लगभग 107.05 मीटर रहा। ये आंकड़े अलग-अलग निगरानी केंद्रों के हैं, इसलिए इनकी तुलना संबंधित केंद्र के चेतावनी और खतरे के निशान से ही की जानी चाहिए।
हनुमान सेतु पर खतरे का निशान 109.50 मीटर बताया गया है। इस केंद्र पर दर्ज स्तर उससे नीचे था। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि शहर के सभी बाढ़ प्रभावित इलाकों में खतरा समाप्त हो गया है। नदी का दबाव, स्थानीय तटबंधों की स्थिति, नालों से पानी का उलटा प्रवाह और निचले क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति भी जोखिम को प्रभावित करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, ऊपरी क्षेत्र भटपुरवा में बुधवार रात 8 बजे दर्ज 113.08 मीटर का स्तर गुरुवार रात 8 बजे घटकर 113 मीटर रह गया। अधिकारियों को उम्मीद है कि ऊपरी इलाकों में पानी घटने का असर धीरे-धीरे लखनऊ के डाउनस्ट्रीम निगरानी केंद्रों पर भी दिखाई देगा।
स्रोत: Hindustan Times की रिपोर्ट और टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट।
पुलिस मुख्यालय के पास तटबंध में दरारें, आसपास के इलाकों पर नजर
गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7 में पुलिस मुख्यालय के सामने बने तटबंध में दरारों की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ओरेंज अपार्टमेंट के सामने तटबंध की मिट्टी का एक हिस्सा धंस गया है। आसपास की जमीन में भी बड़ी दरारें दिखाई दी हैं।
यह क्षेत्र ऐसे स्थानों के करीब है जहां तटबंध के दूसरी तरफ निचली जमीन पर आवासीय और अन्य इमारतें स्थित हैं। यदि मिट्टी का कटाव बढ़ता है या तटबंध का कमजोर हिस्सा क्षतिग्रस्त होता है, तो आसपास के इलाकों में पानी पहुंचने का जोखिम पैदा हो सकता है।
हालांकि, केवल दरारें दिखाई देने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि तटबंध टूटने वाला है। इसके लिए मिट्टी की स्थिति, नदी के दबाव, तटबंध की संरचना और मौके पर किए जा रहे सुरक्षा उपायों का तकनीकी आकलन जरूरी है।
फिलहाल इस क्षेत्र की स्थिति पर निगरानी महत्वपूर्ण है। संबंधित विभागों को दरारों की जांच, कमजोर हिस्से की सुरक्षा और आसपास रहने वाले लोगों को समय पर सूचना देने पर ध्यान देना होगा।
स्रोत: लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट।
इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल के पास फिर बढ़ा था जलभराव
गोमती नदी का बढ़ा हुआ पानी गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7, इकाना स्टेडियम के आसपास, फीनिक्स पलासियो मॉल के नजदीक और शहीद पथ की सर्विस लेन तक पहुंच चुका है। इन क्षेत्रों में नालों के बैकफ्लो और जलनिकासी की समस्या ने हालात को और जटिल बनाया।
लाइव हिन्दुस्तान की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, इकाना और पलासियो क्षेत्र में पानी निकालने के लिए बंद कराया गया नाला गुरुवार सुबह दोबारा टूट गया था। इसके बाद आसपास के कुछ हिस्सों में पानी फिर भरने लगा। रिपोर्ट में आपदा प्रबंधन विभाग, मर्क्योर होटल और टेंडर पाम हॉस्पिटल के आसपास भी जलभराव का उल्लेख किया गया।
स्थिति को संभालने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की टीम मौके पर पहुंची। रिपोर्ट के अनुसार, नाले के क्षतिग्रस्त हिस्से को मिट्टी और बोल्डर से बंद किया गया तथा पानी निकालने के लिए 26 पंप लगाए गए। जलभराव कम होने के बाद प्रभावित मार्ग पर यातायात बहाल किए जाने की भी जानकारी दी गई।
इस घटना से स्पष्ट है कि केवल नदी का जलस्तर घटना ही पर्याप्त नहीं होगा। नालों के मुहानों, अस्थायी अवरोधों और जलनिकासी व्यवस्था की लगातार निगरानी भी जरूरी है, ताकि नदी का पानी दोबारा आबादी की ओर न लौटे।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान
लखनऊ प्रशासन बाढ़ प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने के लिए अभियान चला रहा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और आवागमन के लिए 52 नावें तैनात की थीं। जिलाधिकारी विशाख जी ने जेहटा, बरावन कलां, सैथा, हयात नगर, मुन्ना लाल खेड़ा और उमराई खेड़ा जैसे प्रभावित इलाकों का नाव से निरीक्षण किया। इस दौरान प्रभावित परिवारों तक भोजन और पेयजल पहुंचाने की जानकारी दी गई।
हयात नगर में राहत शिविर स्थापित किए जाने और चिकित्सा तथा राजस्व विभाग की टीमों की तैनाती का भी उल्लेख है। बाढ़ प्रभावित बस्तियों में सांपों और अन्य जीवों के पहुंचने की आशंका को देखते हुए वन विभाग की टीमों को भी तैयार रखा गया है।
इससे पहले जारी राहत संबंधी रिपोर्टों में अस्थायी आश्रय स्थलों, सुरक्षित स्थानों पर परिवारों को पहुंचाने और प्रभावित इलाकों में पेयजल उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, अलग-अलग तारीखों की रिपोर्टों में नावों और राहत संसाधनों की संख्या अलग हो सकती है।
लखनऊ में बिना तेज बारिश के क्यों बढ़ा गोमती का पानी?
लखनऊ में जलभराव का एक प्रमुख कारण ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से गोमती नदी में पहुंचा अतिरिक्त पानी बताया गया है। सितंबर के अंतिम सप्ताह में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर और सीतापुर सहित आसपास के क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का पानी विभिन्न नालों और सहायक धाराओं के माध्यम से गोमती तक पहुंचा।
इसका असर लखनऊ में बाद में दिखाई दिया। यही वजह है कि शहर में नई बारिश नहीं होने के बावजूद नदी का जलस्तर बढ़ता रहा और निचले इलाकों में पानी भर गया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के कारण लखनऊ के लगभग 40 हजार घर प्रभावित हुए थे। यह रिपोर्ट प्रभावित घरों के अनुमान का उल्लेख करती है; इसे शहर के सभी घरों के स्थायी रूप से जलमग्न होने का आंकड़ा नहीं समझना चाहिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट।
गोमती पर स्थायी सुरक्षा तटबंध बनाने की योजना
बार-बार आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए राज्य सरकार ने गोमती नदी के किनारे दीर्घकालिक सुरक्षा तटबंध बनाने की योजना की घोषणा की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद बख्शी का तालाब से नैमिषारण्य तक तटबंध निर्माण की योजना पर काम करने की बात कही थी।
हिन्दुस्तान टाइम्स की 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित तटबंध की लंबाई करीब 70 से 80 किलोमीटर बताई गई थी। इसके साथ ही पक्का पुल से आईआईएम रोड होते हुए फैजुल्लागंज तक एक अन्य तटबंध के तकनीकी अनुमोदन का भी उल्लेख किया गया था।
इसके बाद 8 अक्टूबर को नवभारत टाइम्स ने करीब 2,000 करोड़ रुपये की लागत से 115 किलोमीटर लंबे सुरक्षा तटबंध की योजना की रिपोर्ट प्रकाशित की। अलग-अलग रिपोर्टों में परियोजना की लंबाई और दायरे का विवरण अलग है। इसलिए अंतिम स्वीकृत लंबाई, लागत, निर्माण की समयसीमा और जमीन अधिग्रहण की स्थिति की पुष्टि आधिकारिक परियोजना दस्तावेजों से होनी बाकी है।
यह योजना दीर्घकालिक बाढ़ सुरक्षा से जुड़ी है। इसे मौजूदा बाढ़ के दौरान पहले से पूरी तरह तैयार सुरक्षा व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए।
लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
बाढ़ प्रभावित और नदी के आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए। तटबंधों में दरार या मिट्टी धंसने की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत जानकारी देना जरूरी है।
- नदी के किनारे, कमजोर तटबंधों और तेज बहाव वाले हिस्सों से दूरी बनाए रखें।
- पानी से भरी सड़कों, अंडरपास और नालों को पार करने का जोखिम न लें।
- घर में पानी प्रवेश करने लगे या प्रशासन खाली करने का निर्देश दे, तो सुरक्षित स्थान पर जाएं।
- पीने के पानी और खाने की स्वच्छता पर ध्यान दें तथा बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को प्राथमिकता दें।
- बिजली के उपकरणों या खुले तारों के संपर्क में आए पानी से दूर रहें।
निष्कर्ष
9 अक्टूबर की स्थिति में लखनऊ के लिए तस्वीर मिली-जुली है। एक ओर भटपुरवा जैसे ऊपरी निगरानी केंद्रों पर पानी घटने से अगले 24–48 घंटों में राहत की उम्मीद है, वहीं शहर के कुछ केंद्रों पर जलस्तर बढ़ने और पुलिस मुख्यालय के सामने तटबंध में दरारों की रिपोर्ट के कारण सतर्कता जरूरी है।
अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नदी के जलस्तर के साथ-साथ तटबंधों की तकनीकी स्थिति, नालों से होने वाले बैकफ्लो और बाढ़ प्रभावित बस्तियों की निगरानी लगातार की जाए। जलस्तर में कमी दर्ज होने के बाद भी निचले इलाकों से पानी निकलने में समय लग सकता है।
यह खबर 9 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। जलस्तर और स्थानीय हालात तेजी से बदल सकते हैं; इसलिए ताजा प्रशासनिक निर्देशों को प्राथमिकता दें।