उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के बढ़े जलस्तर ने बीते कई दिनों से जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है। फैजुल्लागंज, दाऊदनगर, घैला, मिल्लत नगर, गोमतीनगर विस्तार और आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंचने से बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए हैं। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब 40 हजार घरों में पानी पहुंचा है, जबकि कई हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में नावों के जरिए राहत और बचाव अभियान तेज किया है। The Indian Express
हालांकि राहत की एक उम्मीद भी सामने आई है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार बुधवार रात गोमती का जलस्तर हनुमान सेतु पर करीब 107.25 मीटर तक पहुंचा, जो चेतावनी स्तर 108.50 मीटर और खतरे के निशान 109.50 मीटर से नीचे है। अधिकारियों का कहना है कि ऊपरी क्षेत्रों से आई बाढ़ की लहर अब गुजरने लगी है और आज से नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटने की संभावना है। The Times of India
फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में हालात गंभीर
गोमती के उफान का सबसे ज्यादा असर लखनऊ के निचले और नदी के आसपास के इलाकों में दिखाई दिया है। फैजुल्लागंज के साथ दाऊदनगर, मामा कॉलोनी और आसपास की बस्तियों में पानी घरों और गलियों तक पहुंच गया। कई स्थानों पर लोगों को नावों के सहारे आवागमन करना पड़ा। The Indian Express
प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। कई परिवार अपने जरूरी सामान को ऊंचे स्थानों पर ले जाने या रिश्तेदारों के घर जाने को मजबूर हुए हैं। Hindustan Times
गोमतीनगर एक्सटेंशन और शहीद पथ तक पहुंचा पानी
बाढ़ का असर सिर्फ पारंपरिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा। शहीद पथ की सर्विस लेन, फीनिक्स पलासियो मॉल की ओर जाने वाला मार्ग और गोमतीनगर विस्तार के कई हिस्से भी पानी से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने जलमग्न मार्गों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को डायवर्ट किया है। NDTV India
इसके अलावा इकाना स्टेडियम के आसपास भी पानी पहुंच गया, जिससे राजधानी के प्रमुख सार्वजनिक और खेल क्षेत्र भी बाढ़ की चपेट में आ गए। NDTV India
बैकुंठ धाम और घाटों पर भी असर
गोमती नदी में बढ़े पानी का असर शहर के धार्मिक और अंतिम संस्कार से जुड़े प्रमुख स्थानों पर भी पड़ा है। बैकुंठ धाम में पानी भरने से अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है। गुलाला घाट और अन्य नदी किनारे के क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। Dynamite News Hindi
इसके अलावा नदी किनारे स्थित कुछ मंदिरों और धार्मिक स्थलों तक भी पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर असर पड़ा है। The Times of India
बिना बारिश के भी क्यों बढ़ गया गोमती का पानी?
लखनऊ में बाढ़ की स्थिति को समझने के लिए यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि शहर में हाल के दिनों में भारी बारिश नहीं हुई, लेकिन इसके बावजूद गोमती का जलस्तर बढ़ता गया। विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार इसका बड़ा कारण गोमती के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हुई असाधारण बारिश है।
22 से 27 सितंबर के बीच पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जैसे जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा वर्षा हुई। वहां से निकलने वाले नाले और धाराएं गोमती में मिलती हैं और इस पानी को लखनऊ तक पहुंचने में कई दिन लगे। इसी वजह से राजधानी में बारिश थमने के बाद भी नदी का जलस्तर बढ़ता रहा। The Indian Express
करीब 40 हजार घर प्रभावित
बाढ़ की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिपोर्टों में करीब 40 हजार घरों तक पानी पहुंचने की जानकारी दी गई है। कुछ रिपोर्टों में लगभग 10 हजार लोगों के सुरक्षित स्थानों की ओर जाने का भी उल्लेख है। Navbharat Times
हालांकि प्रभावित परिवारों की संख्या और विस्थापन का आंकड़ा अलग-अलग क्षेत्रों और समय के अनुसार बदल सकता है। प्रशासन लगातार स्थिति का आकलन कर रहा है और राहत अभियान जारी है।
90 नावों से राहत-बचाव अभियान
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में नावें तैनात की हैं। बुधवार तक 90 नावों के जरिए राहत और रेस्क्यू अभियान चलने की जानकारी सामने आई थी। प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी रैन बसेरे, पेयजल और अन्य जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। NDTV India
जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा टीमों की तैनाती भी की है ताकि दूषित पानी से होने वाली बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित किया जा सके। The Times of India
चार राहत शिविर और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती
जिला प्रशासन के मुताबिक प्रभावित इलाकों में चार राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें दवाइयां उपलब्ध करा रही हैं और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए निगरानी की जा रही है। पुलिस की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में रात की गश्त भी बढ़ाई गई है। The Times of India
वन विभाग की टीमों के सहयोग से सांपों और दूसरे जंगली जीवों के रेस्क्यू की व्यवस्था भी की गई है, क्योंकि लंबे समय तक जलभराव के दौरान ऐसे मामलों का खतरा बढ़ जाता है। The Times of India
डीएम ने किया बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा
लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए व्यवस्था सक्रिय रखी गई है। The Times of India
प्रशासन ने लोगों से जलमग्न सड़कों पर अनावश्यक आवाजाही न करने और स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
अब राहत की उम्मीद, आज से घट सकता है पानी
गोमती के बढ़ते जलस्तर के बीच अब स्थिति में कुछ सुधार की उम्मीद जगी है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार बुधवार रात जलस्तर करीब 107.25 मीटर पर स्थिर रहा। अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी हिस्सों में पानी का स्तर गिरना शुरू हो गया है और इसका असर अगले 12 से 24 घंटों में लखनऊ में भी दिखाई पड़ सकता है। The Times of India
एक रिपोर्ट के अनुसार अगले दो दिनों में गोमती का पानी करीब दो फीट तक नीचे आने की उम्मीद है। हालांकि प्रभावित इलाकों से पानी पूरी तरह निकलने में इससे ज्यादा समय लग सकता है। Amar Ujala
बाढ़ ने लखनऊ की शहरी व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
गोमती की इस बाढ़ ने लखनऊ के शहरी विस्तार और नदी के प्राकृतिक फ्लडप्लेन पर भी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों और रिपोर्टों में इस बात पर ध्यान दिलाया गया है कि नदी के आसपास लगातार बढ़ते निर्माण और शहरीकरण ने बाढ़ के असर को कुछ इलाकों में और गंभीर बनाया हो सकता है। Moneycontrol
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने के बाद फैजुल्लागंज से नैमिष तक तटबंध की योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य भविष्य में गोमती की बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करना है। The Times of India
अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हालात
गोमती का जलस्तर घटने की उम्मीद जरूर है, लेकिन लखनऊ के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी अभी भी मौजूद है। सड़कों, घरों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा पानी पूरी तरह निकलने में समय लग सकता है।
फिलहाल प्रशासन का ध्यान राहत, सुरक्षित निकासी, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और जलनिकासी पर है। आने वाले 24 से 48 घंटे यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि बाढ़ का असर कितनी तेजी से कम होता है।
लखनऊ में गोमती की बाढ़ ने शहर के कई हिस्सों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। करीब 40 हजार घरों के प्रभावित होने, हजारों लोगों के विस्थापन और प्रमुख सड़कों व सार्वजनिक स्थानों पर पानी पहुंचने के बाद अब नदी के घटते जलस्तर से राहत की उम्मीद बनी है।