पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। अभिनेत्री और टीएमसी की राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने गुरुवार को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। कोयल मलिक इसी वर्ष अप्रैल में राज्यसभा सदस्य चुनी गई थीं। उनके इस्तीफे के साथ ही टीएमसी के राज्यसभा सांसदों की संख्या में एक और कमी आ गई है।
कोयल मलिक का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद तृणमूल कांग्रेस लगातार आंतरिक असंतोष और नेताओं के इस्तीफों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद टीएमसी छोड़ चुके हैं, जिससे पार्टी नेतृत्व पर दबाव बढ़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार, कोयल मलिक टीएमसी की चौथी राज्यसभा सांसद हैं जिन्होंने हाल के महीनों में इस्तीफा दिया है। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक भी राज्यसभा की सदस्यता छोड़ चुके हैं और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए थे।
कोयल मलिक के इस्तीफे के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्तीफा देने के बाद उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के लिए पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। हालांकि, अब तक कोयल मलिक या भाजपा की ओर से उनके पार्टी में शामिल होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए टीएमसी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टी के कुछ नेता दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग पार्टी में नहीं रहना चाहते, वे जाने के लिए स्वतंत्र हैं। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि पार्टी अपने सिद्धांतों के साथ आगे बढ़ती रहेगी और जो लोग रहेंगे, वही संगठन को मजबूत करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष लगातार सामने आ रहा है। कई नेताओं के इस्तीफे और पार्टी छोड़ने की घटनाओं ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। हालांकि पार्टी नेतृत्व का दावा है कि इन घटनाओं से संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति के साथ आगे बढ़ेगी।
कोयल मलिक बंगाली फिल्म उद्योग का जाना-पहचाना चेहरा रही हैं और उनके राजनीति में आने को टीएमसी ने एक महत्वपूर्ण कदम माना था। राज्यसभा में उनका कार्यकाल अभी हाल ही में शुरू हुआ था, इसलिए उनका अचानक इस्तीफा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
विपक्षी दल इस घटनाक्रम को टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बता रहे हैं, जबकि टीएमसी नेतृत्व इसे व्यक्तिगत निर्णय करार दे रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कोयल मलिक आगे किस राजनीतिक दल के साथ अपना सफर जारी रखेंगी। भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में टीएमसी से अन्य नेताओं का भी इस्तीफा जारी रहता है, तो इसका असर पार्टी की संसदीय और संगठनात्मक स्थिति पर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर, भाजपा इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल में अपने विस्तार के अवसर के रूप में देख रही है।
फिलहाल कोयल मलिक का इस्तीफा स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद उनके भविष्य की राजनीतिक दिशा पर सभी की नजर रहेगी। चूंकि घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में इस मामले में नए राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
