उत्तर प्रदेश विधानसभा ने अवैध धर्मांतरण से जुड़े मामलों में कानून को और अधिक कठोर बनाने वाले संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लाए गए इस विधेयक में गंभीर मामलों में दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास (उम्रकैद) तक की सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धोखे, दबाव, प्रलोभन या अन्य अवैध तरीकों से कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर प्रभावी रोक लगाना और महिलाओं तथा कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सरकार के अनुसार, संशोधित कानून में अवैध धर्मांतरण से जुड़े अपराधों के लिए सजा और दंड के प्रावधानों को और सख्त किया गया है। विशेष रूप से ऐसे मामलों में, जहां संगठित तरीके से, धोखे, दबाव या प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराने का आरोप हो, या मामला महिला, नाबालिग अथवा विशेष श्रेणी के व्यक्ति से संबंधित हो, वहां दोष सिद्ध होने पर उम्रकैद तक की सजा दी जा सकेगी।
राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श में ऐसे मामलों को अक्सर “लव जिहाद” के नाम से संबोधित किया जाता है। हालांकि यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश के कानून में “लव जिहाद” शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। कानून अवैध या जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े कथित अपराधों पर केंद्रित है और प्रत्येक मामले की जांच उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति छल, दबाव, प्रलोभन, विवाह या अन्य अवैध माध्यमों से धर्म परिवर्तन कराने का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार का दावा है कि संशोधित कानून ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायक होगा।
विधानसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने इसे महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया। सरकार ने कहा कि कानून का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है। सरकार ने यह भी कहा कि प्रत्येक मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई। विपक्ष का कहना है कि कठोर कानूनों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। विपक्ष ने यह भी कहा कि कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कठोर कानून की प्रभावशीलता उसके निष्पक्ष क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उनका कहना है कि केवल आरोप लगने मात्र से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। प्रत्येक मामले में पुलिस जांच, साक्ष्यों का परीक्षण और न्यायालय में आरोप सिद्ध होने के बाद ही दोष तय किया जा सकता है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में अवैध धर्मांतरण से जुड़े मामलों को देखते हुए कानून में संशोधन आवश्यक हो गया था। सरकार के अनुसार, नए प्रावधानों से जांच एजेंसियों को प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और महिलाओं तथा कमजोर वर्गों की सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
फिलहाल उत्तर प्रदेश विधानसभा से यह संशोधन विधेयक पारित हो चुका है। संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने और अधिसूचना जारी होने के बाद संशोधित प्रावधान लागू होंगे। इसके बाद संबंधित मामलों में नई कानूनी व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।