राजस्थान की राजधानी जयपुर में नौ वर्षीय छात्रा की कथित आत्महत्या के मामले में नया मोड़ सामने आया है। घटना के करीब आठ महीने बाद छात्रा के परिवार ने कक्षा के भीतर का सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किया है। परिवार का दावा है कि वीडियो में छात्रा के साथ लगातार कथित बुलिंग (उत्पीड़न) होती दिखाई दे रही है और वह कई बार शिक्षिका से मदद की गुहार लगाती नजर आती है। इस नए वीडियो के सामने आने के बाद मामले की जांच और स्कूल प्रशासन की भूमिका को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
परिवार के अनुसार, यह घटना जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में हुई थी, जहां पिछले वर्ष छात्रा ने स्कूल की चौथी मंजिल से छलांग लगा दी थी। उस समय भी परिजनों ने आरोप लगाया था कि बच्ची लंबे समय से सहपाठियों द्वारा कथित बुलिंग का शिकार हो रही थी और स्कूल प्रशासन ने उनकी शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। अब जारी किए गए सीसीटीवी फुटेज को परिवार अपने आरोपों का महत्वपूर्ण साक्ष्य बता रहा है।
परिजनों का दावा है कि वीडियो में छात्रा कम से कम पांच बार शिक्षिका के पास जाकर मदद मांगती दिखाई देती है। उनका आरोप है कि सहपाठी कथित रूप से उसकी डिजिटल स्लेट छीनते, उसे परेशान करते और बार-बार मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। परिवार का कहना है कि बच्ची ने कई बार शिक्षिका का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन उसे अपेक्षित सहायता नहीं मिली। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर रही हैं।
मामले में स्कूल प्रशासन की ओर से पहले कहा गया था कि घटना अत्यंत दुखद है और जांच में पूरा सहयोग दिया जा रहा है। स्कूल ने छात्रों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था। ताजा सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद इस संबंध में स्कूल की विस्तृत नई प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
इस मामले ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और बुलिंग रोकने की व्यवस्था पर भी बहस तेज कर दी है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी छात्र के साथ लगातार उत्पीड़न की शिकायत मिलती है तो शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है कि वे तत्काल हस्तक्षेप करें और बच्चे को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराएं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बच्चों के व्यवहार में अचानक आने वाले बदलावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पुलिस और संबंधित एजेंसियों को सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और तकनीकी रिपोर्ट का परीक्षण करना होगा। केवल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।
परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बच्ची की शिकायतों पर उचित ध्यान दिया गया होता तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि नए वीडियो सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
यह मामला बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, स्कूलों में एंटी-बुलिंग व्यवस्था और शिक्षकों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली, नियमित काउंसलिंग और संवेदनशील वातावरण विकसित करना ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक है।
फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। अधिकारियों ने कहा है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी।