महाराष्ट्र के ठाणे जिले के डोंबिवली स्थित एक नगर निगम अस्पताल में महिला डॉक्टर और अस्पताल के कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है। इस पूरी घटना का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें एक स्थानीय शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद और उनके समर्थकों पर डॉक्टरों व अस्पताल स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। घटना के बाद पुलिस ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे समेत छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस के अनुसार, यह घटना डोंबिवली के केडीएमसी (कल्याण-डोंबिवली नगर निगम) संचालित शास्त्रीनगर अस्पताल में हुई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, एक गर्भवती महिला का प्रसव कराया गया था। जन्म के बाद नवजात शिशु को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) की आवश्यकता थी, लेकिन अस्पताल के सभी NICU बेड पहले से भरे हुए थे। ऐसे में डॉक्टरों ने परिजनों को बच्चे को किसी अन्य अस्पताल में ले जाने की सलाह दी। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई।
सीसीटीवी फुटेज में कथित तौर पर पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके साथ आए लोगों को अस्पताल परिसर में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ बहस करते तथा बाद में हाथापाई करते हुए देखा जा सकता है। आरोप है कि इस दौरान एक महिला डॉक्टर के साथ भी मारपीट की गई और अन्य कर्मचारियों को धक्का दिया गया। घटना के समय अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई मरीज तथा उनके परिजन भी डर गए।
घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने सुरक्षा की मांग करते हुए नियमित ओपीडी सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दीं। हालांकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं ताकि गंभीर मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि अस्पताल में लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाओं के कारण उनका सुरक्षित वातावरण में काम करना मुश्किल हो गया है।
विष्णु नगर पुलिस ने अस्पताल प्रशासन की शिकायत के आधार पर शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और पांच अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि रमेश म्हात्रे का नाम भी एफआईआर में शामिल है। मामले की जांच जारी है और पुलिस सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
इस घटना के बाद महाराष्ट्र के चिकित्सा समुदाय में नाराजगी देखी गई। विभिन्न डॉक्टर संगठनों ने अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि डॉक्टर और नर्स सुरक्षित वातावरण में काम नहीं कर पाएंगे तो इसका सीधा असर मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
विवाद बढ़ने के बाद रमेश म्हात्रे ने मीडिया से बातचीत में महिला डॉक्टर के साथ मारपीट के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने दावा किया कि वायरल वीडियो का कैमरा एंगल भ्रम पैदा कर रहा है और उनका किसी महिला डॉक्टर को चोट पहुंचाने का इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि संबंधित डॉक्टर उनके लिए “बेटी समान” हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर की जाएगी।
इसी बीच शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ के एक बयान ने भी विवाद को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर पर हमला करना गलत है, लेकिन गुस्से में ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। उनके इस बयान की विभिन्न चिकित्सा संगठनों और विपक्षी दलों ने आलोचना की है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला एक गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाती है और अदालत में आरोप सिद्ध होने के बाद ही किसी आरोपी को दोषी माना जाता है। फिलहाल इस मामले में पुलिस जांच जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।