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Rahul Gandhi Case: हाईकोर्ट में 4000 पेज फाइल, अगली सुनवाई 6 अप्रैल

Rahul Gandhi Citizenship Case: हाईकोर्ट में 4000 पन्नों की फाइल, अगली सुनवाई 6 अप्रैल Rahul Gandhi Citizenship Case को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से करीब 4000 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए। मामले में अब अगली सुनवाई 6 अप्रैल को […]

Rahul Gandhi Case: हाईकोर्ट में 4000 पेज फाइल, अगली सुनवाई 6 अप्रैल

Rahul Gandhi Citizenship Case: हाईकोर्ट में 4000 पन्नों की फाइल, अगली सुनवाई 6 अप्रैल

Rahul Gandhi Citizenship Case को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से करीब 4000 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए। मामले में अब अगली सुनवाई 6 अप्रैल को तय की गई है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

 हाईकोर्ट में अहम सुनवाई, केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार को पक्षकार (पार्टी) बनाने का नोटिस भी जारी किया। High Court Hearing के दौरान पेश किए गए दस्तावेजों को मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 जस्टिस की चेंबर में चली लंबी चर्चा

सुनवाई जस्टिस राजीव सिंह की चेंबर में हुई, जहां लंच के बाद याचिकाकर्ता और केंद्र सरकार के वकीलों के बीच करीब एक घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान पेश किए गए तथ्यों और दस्तावेजों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

 4000 पन्नों में क्या है?

केंद्र सरकार ने गृह मंत्रालय के विदेशी प्रभाग और नागरिकता विंग से जुड़ी फाइलें कोर्ट में दाखिल कीं। बताया जा रहा है कि इन दस्तावेजों में कथित ब्रिटिश नागरिकता से जुड़े कई अहम बिंदु शामिल हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

 30 महीने बाद दिखी बड़ी प्रगति

याचिकाकर्ता के अनुसार, करीब ढाई साल बाद इस मामले में ठोस प्रगति देखने को मिली है। उनका दावा है कि पेश किए गए दस्तावेज केस की दिशा तय कर सकते हैं।

 FIR की मांग और कोर्ट आदेश को चुनौती

याचिका में रायबरेली में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई है। साथ ही विशेष MP-MLA कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें पहले एफआईआर की मांग खारिज कर दी गई थी।

 कई गंभीर कानूनों का हवाला

याचिकाकर्ता ने ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923, पासपोर्ट एक्ट 1967 और फॉरेनर्स एक्ट 1946 के तहत कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामला संज्ञेय अपराध बनता है।

 अब 6 अप्रैल पर टिकी नजरें

इससे पहले कोर्ट ने 9 मार्च 2026 को केंद्र सरकार को पूरी फाइल पेश करने का निर्देश दिया था। अब दस्तावेज दाखिल होने के बाद अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी, जो इस केस में अहम मोड़ ला सकती है।

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