• Home  
  • UP Politics: दलित वोट बैंक के लिए क्यों अहम बने कांशीराम
- उत्तरप्रदेश - राजनीति - लखनऊ

UP Politics: दलित वोट बैंक के लिए क्यों अहम बने कांशीराम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों दलित वोट बैंक को लेकर हलचल तेज है। Bahujan Samaj Party के संस्थापक कांशीराम की जयंती से पहले लगभग सभी राजनीतिक दल उन्हें याद करने में जुटे हैं। यह केवल श्रद्धांजलि नहीं बल्कि UP Politics में दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा […]

UP Politics: दलित वोट बैंक के लिए क्यों अहम बने कांशीराम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों दलित वोट बैंक को लेकर हलचल तेज है। Bahujan Samaj Party के संस्थापक कांशीराम की जयंती से पहले लगभग सभी राजनीतिक दल उन्हें याद करने में जुटे हैं। यह केवल श्रद्धांजलि नहीं बल्कि UP Politics में दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सभी दल मना रहे कांशीराम जयंती

15 मार्च को कांशीराम की जयंती है। इससे पहले ही अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अपने-अपने कार्यक्रम घोषित कर दिए हैं।बीएसपी की ओर से लखनऊ में बड़ी जनसभा आयोजित की जा रही है, जबकि कई राज्यों में भी पार्टी कार्यकर्ता कार्यक्रम कर रहे हैं।

वहीं सपा ने भी सभी जिलों में कांशीराम जयंती मनाने का ऐलान किया है। दूसरी ओर Indian National Congress ने जयंती समारोह और दलित संवाद कार्यक्रम आयोजित किया।

राहुल गांधी का बयान भी चर्चा में

कांग्रेस के कार्यक्रम में पहुंचे Rahul Gandhi ने कांशीराम को याद करते हुए कहा कि अगर Jawaharlal Nehru होते तो कांशीराम मुख्यमंत्री बन सकते थे। इस दौरान कांशीराम को भारत रत्न देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान भी कहीं न कहीं दलित राजनीति को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा हैं।

दलित वोट बैंक पर सभी दलों की नजर

दरअसल, उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक का राजनीतिक महत्व काफी बड़ा है। प्रदेश में करीब 21 फीसदी दलित आबादी है। राज्य की 85 विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं।

हालांकि केवल आरक्षित सीटों पर ही नहीं, बल्कि सामान्य सीटों पर भी दलित मतदाताओं का प्रभाव चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि BSP, SP, Congress और BJP समेत सभी दल दलित वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

 कांशीराम की विरासत अहम

कांशीराम को उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति के सबसे बड़े नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने बीएसपी की स्थापना कर दलितों को राजनीतिक ताकत देने की कोशिश की। आज भी उनकी विरासत और विचारधारा UP Politics में दलित वोट बैंक को प्रभावित करने वाला बड़ा फैक्टर मानी जाती है।

इसी कारण उनकी जयंती के अवसर पर लगभग सभी राजनीतिक दल सक्रिय दिखाई दे रहे हैं और दलित समाज तक अपनी पहुंच मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

अन्य खबर पढ़े।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About Us

We are a trusted news portal delivering the latest updates, breaking news, and in-depth stories from around the world. Our goal is to keep you informed, every time.

 

Address : 18/587, behind : Hanuman Mandir, opposite :Lucknow, Uttar Pradesh, India , 226016

Email Us: up24networkk@gmail.com

Contact: +91 95111 50055

Quick Link

Top Categories

Pushpa Technosoft  @2024. All Rights Reserved.