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Middle East War: संकट में भारत के किसान, एक्सपोर्ट प्रभावित

Middle East War Impact: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत के कृषि व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने और गैस आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारतीय किसानों और निर्यातकों को भी […]

Middle East War: संकट में भारत के किसान, एक्सपोर्ट प्रभावित

Middle East War Impact: मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत के कृषि व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने और गैस आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारतीय किसानों और निर्यातकों को भी बड़ा झटका लगा है।

युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के रास्ते होने वाला व्यापार प्रभावित हुआ है, जिससे भारत से खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले बासमती चावल और अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात लगभग ठप हो गया है।

Basmati Rice Export पर पड़ा बड़ा असर

भारत का बड़ा हिस्सा बासमती चावल निर्यात पश्चिम एशियाई देशों को होता है। लेकिन मौजूदा युद्ध के कारण कई शिपमेंट बंदरगाहों और समुद्र में फंस गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 4 लाख टन बासमती चावल भारत के बंदरगाहों या समुद्री मार्ग में अटका हुआ है। इससे निर्यातकों और मिल मालिकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

किसानों की कमाई में गिरावट

निर्यात बाधित होने से स्थानीय बाजार में बासमती चावल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है। छोटे मिल मालिकों को निर्यातकों से मिलने वाली कीमत 8–9 फीसदी तक कम हो गई है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ा है, क्योंकि वे धान इन्हीं मिल मालिकों को बेचते हैं। आंकड़ों के अनुसार किसानों की कमाई में लगभग 9 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है।

अगर युद्ध लंबा चला तो बढ़ेगा नुकसान

व्यापार से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह युद्ध एक-दो महीने और चलता है तो किसानों को मिलने वाली धान की कीमतों में 10–15 फीसदी तक और गिरावट हो सकती है। इससे कृषि क्षेत्र में बड़ा आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।

खतरे में भारत का कृषि निर्यात

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम एशिया भारत के कृषि निर्यात का लगभग 20 फीसदी बाजार है। वर्ष 2025 में इस क्षेत्र में भारत का कृषि निर्यात करीब 11.8 अरब डॉलर रहा था।

भारत के कुल चावल निर्यात का करीब 36.7 फीसदी हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों को जाता है, इसलिए वहां की स्थिति का भारतीय किसानों और निर्यातकों पर सीधा असर पड़ रहा है।

इन देशों में जाता है भारतीय बासमती

भारत हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल का निर्यात करता है, जिसमें से दो-तिहाई हिस्सा पश्चिम एशिया भेजा जाता है। प्रमुख बाजारों में शामिल हैं:

  • ईरान

  • इराक

  • यमन

  • सीरिया

  • सऊदी अरब

  • जॉर्डन

  • लेबनान

  • इजराइल

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)

युद्ध की वजह से इन देशों तक पहुंचने वाली सप्लाई प्रभावित होने से भारतीय किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।

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