प्रयागराज माघ मेले में स्नान को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने माघ पूर्णिमा पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दोबारा पूरे सम्मान के साथ स्नान कराने की किसी भी कोशिश से इनकार कर दिया है। अधिकारियों ने साफ कहा कि मौनी अमावस्या के बाद स्वामी जी से दोबारा संपर्क करने की खबरें तथ्यहीन हैं।
PRO के दावे को प्रशासन ने नकारा
यह बयान ऐसे समय में आया है, जब शंकराचार्य के जनसंपर्क अधिकारी ने दावा किया था कि प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, प्रयागराज प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि उनकी ओर से ऐसी कोई पहल नहीं की जा रही है।
बटुकों से मारपीट का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
मौनी अमावस्या के दिन बटुकों के साथ हुई मारपीट का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस संबंध में एक लेटर पिटीशन दाखिल की गई है, जिसमें
दोषी पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने,
संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने,
और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की गई है।
याचिका दाखिल होने के बाद माघ मेले के दौरान प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रखीं कड़ी शर्तें
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दोबारा स्नान को लेकर प्रशासन के सामने दो प्रमुख शर्तें रखी हैं—
मौनी अमावस्या के दिन हुई कथित अभद्रता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की लिखित माफी
चारों शंकराचार्यों के स्नान के लिए एक स्थायी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) तय की जाए
इसके अलावा, मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की गई है।








