UGC नए नियमों पर संजय निषाद का बयान: बोले– कानून लागू होने से पहले विरोध करना लोकतंत्र पर सवाल
देश में UGC के नए नियमों को लेकर जारी बहस के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने कानपुर में खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और संसद से पारित हर कानून जनता के हित को ध्यान में रखकर ही बनाया जाता है। किसी कानून को लागू होने से पहले ही नुकसानदेह बताना जल्दबाजी है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।
संवैधानिक प्रक्रिया से बनते हैं कानून
संजय निषाद ने कहा कि देश में कोई भी कानून एक लंबी संवैधानिक प्रक्रिया के बाद बनता है। आयोगों की रिपोर्ट, विशेषज्ञों की राय और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया जाता है। UGC से जुड़ा नया कानून भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।उन्होंने कहा कि पहले कानून को लागू होने देना चाहिए। अगर बाद में कोई खामी सामने आती है, तो संशोधन का रास्ता हमेशा खुला रहता है। यही लोकतंत्र की खूबसूरती है।
10% EWS आरक्षण का दिया उदाहरण
आरक्षण और सामाजिक न्याय का जिक्र करते हुए संजय निषाद ने कहा कि संविधान का मूल उद्देश्य समाज में बराबरी और सम्मान स्थापित करना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, तब किसी ने इसका विरोध नहीं किया। महिलाओं को आरक्षण मिला, तब भी समाज ने इसे स्वीकार किया। ऐसे में सामाजिक भेदभाव खत्म करने के लिए लाए गए कानूनों का स्वागत होना चाहिए।
OBC वर्ग में भी बढ़ा भेदभाव
संजय निषाद ने कहा कि रिपोर्टों में सामने आया है कि भेदभाव अब केवल अनुसूचित जाति और जनजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि ओबीसी वर्ग के भीतर भी बढ़ा है। यदि आयोग ने तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर रिपोर्ट दी है और उसी आधार पर कानून बनाया गया है, तो उसे जातिवाद से जोड़कर देखना गलत है।
इस्तीफा निजी मामला
कुछ नेताओं के इस्तीफे पर पूछे गए सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि यह उनका निजी फैसला है। इसका UGC कानून या सरकार की मंशा से सीधा संबंध नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सामाजिक समानता जैसे विषयों को राजनीतिक रंग देना ठीक नहीं है।








