लखनऊ में गोमती तट स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय संस्कृति उपवन में आयोजित उत्तरायणी कौथिग मेला इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले में 12 राज्यों के 150 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां पहाड़ों की खुशबू, लोकसंस्कृति की रंगत और देसी स्वाद का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। यह मेला 28 जनवरी तक चलेगा।
मेले में मिट्टी के इत्र से लेकर अल्मोड़ा की प्रसिद्ध बाल मिठाई तक की खूब मांग है। बांस से बनी पेंटिंग, हैंडलूम साड़ियां, पारंपरिक हस्तशिल्प, फर्नीचर और सजावटी सामान लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं। वहीं जोड़ों के दर्द और हाई बीपी से परेशान लोग पहाड़ी लहसुन की खरीदारी कर रहे हैं।
पहाड़ी उत्पादों की भरमार
उत्तरायणी कौथिग में पहाड़ों में उगने वाले अनाज, जड़ी-बूटियां और ऑर्गेनिक उत्पादों के स्टॉल लगे हैं। उत्तराखंड की पारंपरिक मिठाइयों, क्रॉकरी, महिलाओं के श्रृंगार सामग्री और बांस से बने सजावटी सामानों की अच्छी बिक्री हो रही है।
हथकरघा और पहाड़ी टोपी की खास पहचान
हिमाचल प्रदेश से आए कारीगरों द्वारा प्रस्तुत हथकरघा से बने शॉल, सदरी, स्टॉल और पहाड़ी टोपियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। पहाड़ी टोपी को पहाड़ की शान माना जाता है और इसकी कीमत ₹150 से ₹550 तक है। इन उत्पादों की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी है।
फूस घास से बने अनोखे उत्पाद
उत्तराखंड की महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा फूस घास (भूसा घास) से तैयार किए गए उत्पाद भी मेले में उपलब्ध हैं। इससे गणेश जी की मूर्ति वाले डिब्बे बनाए जाते हैं, जिनकी मजबूती 7–8 साल तक रहती है।
बाल मिठाई और पहाड़ी स्वाद का क्रेज
मेले में बाल मिठाई, सिंगोरी और पहाड़ी चॉकलेट की जबरदस्त मांग है। बाल मिठाई ₹600 प्रति किलो, सिंगोरी ₹900 और चॉकलेट ₹700 प्रति किलो में मिल रही है।
पहाड़ी लहसुन और कश्मीरी ड्राई फ्रूट
कश्मीर से आए व्यापारियों के स्टॉल पर कश्मीरी अखरोट, केसर, शहद और पहाड़ी लहसुन उपलब्ध हैं। पहाड़ी लहसुन को जोड़ों के दर्द और बीपी के लिए लाभकारी माना जाता है और इसकी कीमत ₹1500 प्रति किलो है।
मिट्टी का इत्र बना आकर्षण
कन्नौज से आए इत्र व्यापारियों के यहां मिट्टी का इत्र, गुलाब, बेला, खस और चंदन इत्र उपलब्ध हैं। मिट्टी का इत्र कुल्हड़ के डिस्टिलेशन से तैयार किया जाता है, जिसमें चंदन के तेल का उपयोग होता है।
फर्नीचर, झूले और होम डेकोर
सहारनपुर से आए कारीगरों के स्टॉल पर फर्नीचर और होम डेकोर की रेंज मौजूद है। झूलों की सबसे अधिक मांग है, जिनकी कीमत ₹15,000 से ₹1.5 लाख तक है।
देसी स्वाद और राजस्थानी व्यंजन
राजस्थान से आए स्टॉल पर दाल-बाटी-चूरमा, कचौड़ी, मिर्ची बड़ा, जलेबी और मूंग दाल हलवा का स्वाद लोग ले रहे हैं।
बांस से बनी पेंटिंग और हस्तशिल्प
अल्मोड़ा से आए कारीगरों द्वारा तैयार बांस से बनी पेंटिंग, टोकरियां, लैंप, बैग और वॉल हैंगिंग को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। सभी उत्पाद हाथ से बनाए गए हैं।








