लखनऊ में सोमवार को संयुक्त वाम मोर्चा और कम्युनिस्ट दलों ने मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) में प्रस्तावित बदलावों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा की मूल भावना को कमजोर करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने का आरोप
वाम दलों का कहना है कि मनरेगा जैसी ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी योजना को समाप्त करने की दिशा में नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं। आरोप लगाया गया कि ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन’ जैसे नए प्रावधानों के जरिए मनरेगा को धीरे-धीरे हाशिए पर डाला जा रहा है, जिससे ग्रामीण मजदूरों और किसानों को सीधा नुकसान होगा।
राज्य सरकारों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मनरेगा में केंद्र और राज्य सरकारों की वित्तीय हिस्सेदारी बदली जा रही है। जहां पहले केंद्र सरकार का योगदान अधिक था, वहीं नए प्रस्तावों में राज्य सरकारों पर ज्यादा बोझ डाला जा रहा है।वाम दलों का आरोप है कि आर्थिक संकट से जूझ रही राज्य सरकारें इस अतिरिक्त जिम्मेदारी को निभा नहीं पाएंगी, जिससे योजना अपने आप कमजोर हो जाएगी।
ग्रामीण मजदूरों के भविष्य पर खतरा
वाम मोर्चा नेताओं ने कहा कि मनरेगा करोड़ों ग्रामीण मजदूरों के लिए रोजगार की गारंटी है। यदि यह योजना कमजोर होती है तो
ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी बढ़ेगी
पलायन में इजाफा होगा
गरीब और मजदूर वर्ग पर सीधा असर पड़ेगा
उन्होंने प्रस्तावित बदलावों को मजदूर-विरोधी कदम करार दिया।








