PK ने मांगे 1-1 हजार, नहीं देने वालों से दूरीPK ने मांगे 1-1 हजार, नहीं देने वालों से दूरी

PK ने मांगे 1-1 हजार: बिहार चुनाव हार के बाद प्रशांत किशोर बोले—NDA ने 10-10 हजार देकर खरीदे वोट, पूरी संपत्ति जनसुराज को डोनेट की

बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद जनसुराज प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। मौन व्रत खत्म करने के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए NDA पर वोट खरीदने का गंभीर आरोप लगाया।
PK ने कहा—“सरकार ने 10-10 हजार रुपए देकर वोट खरीदे। प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से वोट खरीद-फरोख्त हुई। जनसुराज हारा नहीं है, उसे कुचलने की कोशिश हुई है।”

PK ने मांगे 1-1 हजार, बोले—जो नहीं देगा, उनसे नहीं मिलूंगा

प्रशांत किशोर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से लोगों से 1-1 हजार रुपए सहयोग की अपील की।उन्होंने कहा— “3 साल बिहार में घूमने से मेरे पैसे खत्म हो गए। आगे के 5 साल में मैं जो कमाऊंगा, उसका 90% जनसुराज को दूंगा। जो भी संपत्ति 20 साल में अर्जित की है, दिल्ली वाला फ्लैट छोड़कर सारी जनसुराज को डोनेट कर रहा हूं। जो लोग हमारी मदद नहीं करेंगे, मैं उनसे नहीं मिलूंगा।” PK की यह टिप्पणी बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ रही है।

गांधी आश्रम में 24 घंटे का मौन व्रत, आत्ममंथन का समय

प्रशांत किशोर ने पश्चिम चंपारण के भितिहरवा गांधी आश्रम में 24 घंटे का मौन उपवास रखा।

  • पीके पूरी रात धरना स्थल पर बैठे-बैठे ही सो गए

  • सुबह भी बैठे-बैठे सोते नजर आए

  • ठंड के बावजूद 50 से अधिक लोग मौन व्रत के दौरान मौजूद रहे

जनसुराज ने स्पष्ट किया कि यह व्रत विरोध नहीं, बल्कि आत्ममंथन के लिए है। पीके मिशन 2025 और संगठन की दिशा पर कई दिनों से मंथन कर रहे थे।

जनसुराज की करारी हार—243 सीटों पर खाता तक नहीं खुला

इस चुनाव में जनसुराज ने बिहार की 243 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन

  • पार्टी का खाता तक नहीं खुला

  • 98% उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई

  • नतीजों के 3 दिन बाद PK ने खुले तौर पर हार की जिम्मेदारी ली

  • जनता से माफी मांगी और एक दिन के मौन व्रत की घोषणा की

PK के आरोप—लोकतंत्र को कलंकित किया गया

PK और जनसुराज नेताओं का कहना है कि इस चुनाव में बड़े पैमाने पर वोट खरीदने के प्रयास हुए।जनसुराज नेता व भोजपुरी स्टार रितेश पांडे ने कहा—“बिहार में गरीबी, पलायन और शिक्षा पर जो ईमानदारी से बात कर रहा था, उसे कमजोर करने के लिए सबसे घृणित काम—वोट खरीदने—का सहारा लिया गया। बिहारियों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ हुआ।”

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