UP Vidhan Sabha Budget Session के आखिरी दिन सदन में जमकर बहस और हंगामा देखने को मिला। विधानसभा के बाद विधान परिषद में भी विधायकों ने अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया।शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि डीएम फोन नहीं उठाते और उनके अर्दली फोन रिसीव कर बहस करने लगते हैं।
विधायकों ने अधिकारियों पर उठाए सवाल
एमएलसी उमेश द्विवेदी ने कहा कि उन्होंने पांच बार फोन किया, लेकिन हर बार जवाब मिला कि “मैडम व्यस्त हैं।”जासमीर अंसारी ने दावा किया कि उनके क्षेत्र में तीन विधायकों और एक मंत्री को अधिकारियों के खिलाफ धरना देना पड़ा।सुरेंद्र चौधरी ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के एमडी को फोन करने पर पीआरओ ने खुद को एमडी बताकर बात की। जब संदेह हुआ और दोबारा पूछा गया तो बताया गया कि एमडी से बात नहीं हो सकती।इस पर Keshav Prasad Maurya ने आश्वासन दिया कि वह स्वयं अधिकारियों से बात करेंगे।
राजभर का मदरसा बयान
मंत्री Om Prakash Rajbhar ने मदरसा जांच को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज और कुशीनगर में मदरसों में अवैध गतिविधियां पकड़ी गईं और बहराइच में मदरसे में वीआईपी होटल बनाकर विदेशियों को ठहराया जा रहा था।उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे मामलों की जांच नहीं होनी चाहिए?
पूर्व CM पर तंज और सदन में नोकझोंक
डिप्टी CM केशव मौर्य ने पूर्व मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि वे पूर्व मुख्यमंत्री थे और पूर्व ही रहेंगे।इस दौरान सुरक्षा सूची को लेकर भी सवाल उठा, जिस पर सभापति ने हल्के अंदाज में टिप्पणी की— “क्या आप अटेंडेंस लेंगे?”
मंत्री की अनुपस्थिति पर नाराजगी
भाजपा एमएलसी के सवाल का जवाब देने के दौरान संबंधित मंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। सभापति ने दो बार उनका नाम पुकारा। बाद में मंत्री के पहुंचने पर सभापति ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और महंगाई पर बहस
विधानसभा में विधायक रागिनी सोनकर ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को हटाए जाने का मुद्दा उठाया। मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सरकार ने तय किया है कि किसी कर्मचारी को नहीं निकाला जाएगा।








