उत्तर प्रदेश के Sambhal हिंसा मामले में अदालत द्वारा सीओ अनुज चौधरी और तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश के बाद सियासत तेज हो गई है। इस घटनाक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने न सिर्फ बीजेपी पर हमला बोला, बल्कि यूपी के प्रशासनिक अधिकारियों को भी बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
अखिलेश यादव ने साफ शब्दों में कहा कि अब अनुज चौधरी को बचाने कोई नहीं आएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे पक्षपाती पुलिस अधिकारी अंत में अकेले रह जाते हैं और उन्हें अपने फैसलों पर पछताना पड़ता है। अखिलेश ने कहा कि बीजेपी पहले इस्तेमाल करती है और फिर छोड़ देती है, यही उसका राजनीतिक फॉर्मूला है।
अखिलेश ने गिनाए बीजेपी के दो ‘फॉर्मूले’
संभल के तत्कालीन सीओ Anuj Chaudhary के मामले को उदाहरण बनाते हुए अखिलेश यादव ने बीजेपी की कार्यशैली पर तीखा तंज कसा।
उन्होंने कहा—
पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो
बीजेपी में कोई किसी का सगा नहीं होता
अखिलेश का आरोप है कि बीजेपी अपने राजनीतिक फायदे के लिए अधिकारियों और नेताओं का उपयोग करती है और संकट के समय उन्हें अकेला छोड़ देती है। उनके मुताबिक, यही हाल अब अनुज चौधरी का हुआ है।
संभल हिंसा और पुलिस की भूमिका पर सवाल
संभल हिंसा के दौरान सीओ रहे और वर्तमान में फिरोजाबाद में तैनात एएसपी अनुज चौधरी की भूमिका पर सपा लगातार सवाल उठाती रही है। मुस्लिम समुदाय की ओर से उन पर पक्षपात के आरोप लगे थे और उनकी मौजूदगी में गोली चलने की घटना भी सामने आई थी।
संभल से सांसद Zia Ur Rahman Barq ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “कानून से ऊपर कोई नहीं—न वर्दी, न ओहदा।” उन्होंने अदालत के आदेश को ऐतिहासिक बताया, जिसमें तत्कालीन सीओ समेत पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।
अफसरों को सीधा संदेश
अखिलेश यादव का कहना है कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने प्रशासन और पुलिस का राजनीतिकरण कर सत्ता को मजबूत किया है। अनुज चौधरी का मामला केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि अफसरशाही के लिए चेतावनी है कि राजनीतिक इस्तेमाल से बचें, क्योंकि संकट के समय बीजेपी बचाने नहीं आएगी।
कोर वोटबैंक साधने की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे के जरिए अखिलेश यादव ने सपा के कोर वोटबैंक माने जाने वाले मुस्लिम समुदाय को भी सीधा संदेश देने की कोशिश की है। संभल हिंसा के बाद मुस्लिम समाज में नाराजगी थी और कोर्ट के आदेश के बाद सपा ने इसे राजनीतिक रूप से भुनाने का मौका नहीं छोड़ा।








