UP Politics: Phoolan Devi कनेक्शन से Akhilesh का ‘Double M’ दांव, 2027 चुनाव पर नजर
Uttar Pradesh में UP Politics 2027 विधानसभा चुनाव से पहले ही गरमाने लगी है। Akhilesh Yadav ने अपने PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने के लिए बड़ा सियासी दांव चला है। उन्होंने Phoolan Devi की बहन रुक्मिणी देवी निषाद को समाजवादी महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर नई रणनीति की शुरुआत की है।
‘Double M’ Strategy: महिला और मल्लाह वोट बैंक पर फोकस
Akhilesh Yadav का यह कदम Double M (Mahila + Mallah) रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इस फैसले के जरिए:
महिला वोटर्स को साधने की कोशिश
मल्लाह/निषाद समुदाय को सियासी संदेश
रुक्मिणी देवी निषाद का सपा से पुराना जुड़ाव रहा है और वह जमीनी स्तर पर सक्रिय रही हैं, जिससे संगठन को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
महिला वोटर्स को साधने की कोशिश
रुक्मिणी देवी की नियुक्ति को Women Empowerment in Politics के तौर पर भी देखा जा रहा है। Samajwadi Party महिला भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आगामी चुनावों के लिए महिला वोटर्स को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
मल्लाह (निषाद) वोट बैंक पर बड़ा दांव
Phoolan Devi मल्लाह समुदाय से आती थीं और इस समाज में उनकी गहरी पकड़ रही है।
काशी, पूर्वांचल और मध्य यूपी के कई जिलों में निषाद वोट निर्णायक
करीब 6% आबादी और 150 से ज्यादा उपजातियां
लगभग 160 विधानसभा सीटों पर प्रभाव
इसी कारण सभी राजनीतिक दल इस वोट बैंक को साधने की कोशिश करते रहे हैं।
BJP vs SP: निषाद वोटों की सियासी लड़ाई
Bharatiya Janata Party (BJP) पहले से ही निषाद वोटों के लिए गठबंधन कर चुकी है। ऐसे में Akhilesh का यह कदम:
बिखरे हुए निषाद वोटों को फिर से जोड़ने की कोशिश
2017 के बाद बदले सियासी समीकरण को पलटने की रणनीति
Phoolan Devi फैक्टर क्यों है अहम
Phoolan Devi का नाम आज भी:
दलित और पिछड़े वर्ग की महिलाओं में प्रभावशाली
मल्लाह समुदाय के बीच मजबूत पहचान
माना जाता है कि उनके संघर्ष की छवि आज भी सियासत में असर डालती है, जिसका फायदा सपा उठाना चाहती है।
2027 चुनाव में क्या पड़ेगा असर?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक:
रुक्मिणी देवी की नियुक्ति PDA समीकरण को मजबूत कर सकती है
निषाद समाज को जोड़ने में मदद मिल सकती है
कई सीटों पर चुनावी समीकरण बदल सकते हैं
हालांकि, यह देखना अहम होगा कि सपा का यह दांव BJP के खिलाफ कितना असरदार साबित होता है।







