उत्तर प्रदेश में Allahabad High Court Lucknow Bench में सूचीबद्ध मामलों की भारी संख्या के बीच एक न्यायाधीश ने फैसला लिखाने में असमर्थता जताई।24 फरवरी को न्यायमूर्ति Subhash Vidyarthi की एकल पीठ ने एक मामले की सुनवाई शाम 7:10 बजे तक करने के बाद आदेश में टिप्पणी की कि वह भूखे, थके और शारीरिक रूप से निर्णय लिखाने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए आदेश सुरक्षित रखा जाता है।
DRT आदेश के खिलाफ दायर थी याचिका
यह मामला वर्ष 2025 में Debt Recovery Tribunal (DRT) के आदेश के खिलाफ दायर याचिका से जुड़ा था।मई 2025 में हाईकोर्ट ने डीआरटी के आदेश को निरस्त कर दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, इस आदेश को Supreme Court of India में चुनौती दी गई।
25 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया कि संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर नहीं मिला। साथ ही निर्देश दिया गया कि मामले में छह माह के भीतर निर्णय दिया जाए। यह समयसीमा 24 फरवरी 2026 को पूरी हो रही थी।
235 मामलों के बीच चली लंबी सुनवाई
24 फरवरी को न्यायमूर्ति विद्यार्थी के समक्ष कुल 235 मामले सूचीबद्ध थे, जिनमें:
92 नए मामले
101 नियमित मामले
39 नए विविध आवेदन
अतिरिक्त सूची के 3 मामले
शाम 4:15 बजे तक 29 ताजा मामलों की सुनवाई हो चुकी थी। इसके बाद संबंधित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई, जो रात 7:10 बजे तक चली।







