UP STF ने कोडीन सिरप तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया; दो भाई गिरफ्तार, 65 फर्जी फर्मों के जरिए देशभर में चल रहा था ड्रग सप्लाई रैकेट
उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़ कर दो प्रमुख आरोपियों—अभिषेक शर्मा और उसके भाई शुभम—को लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र से गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी सहारनपुर के निवासी हैं और नई दिल्ली में स्थित एबॉट कंपनी के सुपर डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में काम कर रहे थे।
जांच में यह पूरा नेटवर्क विशाल और विभोर राणा द्वारा संचालित कोडीन सिरप तस्करी सिंडिकेट से जुड़ा पाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि अभिषेक 2019 से सहारनपुर में स्थित जीआर ट्रेडिंग में काम करता था और धीरे-धीरे इस अवैध नेटवर्क का अहम हिस्सा बन गया।
फर्जी फर्मों के जरिए कफ सिरप की खरीद-बिक्री दिखाकर तस्करों तक पहुंचाया जाता था माल
एसटीएफ के अनुसार, तस्करी का पूरा खेल 65 से अधिक फर्जी फर्मों के माध्यम से चलाया जा रहा था।
एबॉट कंपनी की फेंसेडिल कफ सिरप इन फर्मों के नाम पर मंगाई जाती
कागज़ों में खरीद-बिक्री दिखाकर असल माल तस्करों तक पहुंचा दिया जाता
सिरप की खेप बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजी जाती थी
इन फर्जी फर्मों की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में सहारनपुर के एक चार्टर्ड अकाउंटेंट अरुण सिंघल की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि उन्होंने कई काल्पनिक फर्में खोलने में गिरोह की मदद की।
सुपर डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए कंपनी अधिकारियों से मिलीभगत का आरोप
जेल से विशाल राणा की रिहाई के बाद गिरोह ने एबॉट कंपनी के कुछ अधिकारियों से कथित साठगांठ कर बीएन फार्मास्यूटिकल्स के लाइसेंस पर सहारनपुर का सीएफए हासिल कर लिया।इसके बाद जनवरी 2024 में मारुति मेडिकोज को उत्तराखंड का सुपर डिस्ट्रीब्यूटर बनाया गया।सभी बिलों पर ‘सचिन कुमार’ के नाम से अभिषेक शर्मा साइन करता था, जिससे उसकी भूमिका और गहरी हो गई।
दिल्ली, आगरा, कानपुर, गोरखपुर, लखनऊ तक फैला नेटवर्क; बांग्लादेश तक सप्लाई
दिल्ली में अभिषेक के नाम पर AV फार्मास्यूटिकल्स नाम की फर्जी फर्म बनाई गई थी। इसे गिरोह के सदस्य—सौरभ त्यागी और पप्पन यादव—चलाते थे। इसी फर्म से कोडीन युक्त सिरप की सप्लाई—
आगरा
बनारस
गोरखपुर
कानपुर
लखनऊ
के रास्ते मालदा, त्रिपुरा और फिर बांग्लादेश तक की जाती थी।
ई-वे बिल से पकड़ा गया माल, इसके बाद गिरोह पर शिकंजा
अप्रैल 2024 में मोडन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए मारुति मेडिकोज और AV फार्मास्यूटिकल्स से भेजी गई फेंसेडिल की बड़ी खेप सीतापुर के ई-वे बिल ट्रैकिंग में पकड़ी गई, जिसके बाद एसटीएफ ने नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाई।कंपनी ने बाद में अपने सभी स्टॉक वापस लेकर शैली ट्रेडर्स को दे दिए। इसके बाद सिंडिकेट ने ओनेरेक्स और स्कैफ कफ सिरप की तस्करी शुरू कर दी थी।
मुख्य आरोपी जेल में, दो भाई अंबाला में छिपे थे
11 नवंबर 2025 को गिरोह के मुख्य सदस्य—विशाल सिंह, विभोर राणा, सचिन और बिट्टू—गिरफ्तार कर लिए गए थे।
इसके बाद अभिषेक और शुभम दोनों अंबाला में छिपते फिर रहे थे।एसटीएफ अब दोनों आरोपियों से—
कंपनी अधिकारियों की भूमिका
फर्जी फर्म बनाने की प्रक्रिया
विदेशी सप्लाई चैनल
नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों पर पूछताछ कर रही है।








