बहुजन समाज पार्टी के पूर्व कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब आधिकारिक तौर पर समाजवादी पार्टी का हिस्सा बन चुके हैं। कांग्रेस में उपेक्षा के बाद उन्होंने Akhilesh Yadav की मौजूदगी में सपा जॉइन की।Naseemuddin Siddiqui SP Role को लेकर अब यूपी की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
क्या है सपा की रणनीति?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा को उम्मीद है कि सिद्दीकी की एंट्री से मुस्लिम वोटों का बिखराव रुकेगा।
ओवैसी फैक्टर को कमजोर करने की कोशिश
छोटे मुस्लिम दलों के प्रभाव को सीमित करना
चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण मजबूत करना
सपा नहीं चाहती कि मुस्लिम वोट बैंक में कोई बड़ा विभाजन हो।
‘फंड मैनेजर’ की भूमिका में फिट?
बसपा में रहते हुए सिद्दीकी को पार्टी का मजबूत फंड मैनेजर माना जाता था। चुनावी संसाधनों के प्रबंधन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा को मजबूत फंड मैनेजमेंट की जरूरत है। यदि सिद्दीकी यह भूमिका निभाते हैं, तो वे अखिलेश के लिए बड़ा एसेट साबित हो सकते हैं।
मुस्लिम चेहरों के बीच जगह बनाना चुनौती
समाजवादी पार्टी में पहले से कई बड़े मुस्लिम चेहरे सक्रिय हैं। ऐसे में सिद्दीकी को संगठन में अपनी जगह मजबूत करने के लिए अलग रणनीति अपनानी होगी।राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, उनका स्वभाव अपेक्षाकृत संतुलित और तालमेल वाला है। इससे संगठन के भीतर टकराव की संभावना कम मानी जा रही है।
क्या बनेंगे किसी बड़े नेता का विकल्प?
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि क्या सिद्दीकी को किसी कद्दावर मुस्लिम चेहरे के विकल्प के रूप में लाया गया है?हालांकि, उनका प्रभाव क्षेत्र अलग है और वे सीधे टकराव के बजाय समन्वय की राजनीति कर सकते हैं।








