राम मंदिर ध्वजारोहण: अयोध्या में धर्मध्वज फहरने के बाद पीएम मोदी बोले—यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है; संबोधन की बड़ी बातें
अयोध्या में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहराकर ऐतिहासिक क्षण की शुरुआत की। उनके साथ RSS प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मौजूद रहे।ध्वजारोहण के बाद पीएम मोदी ने रामलला के दर्शन किए, राम दरबार में पूजा-अर्चना की और हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “आज संपूर्ण भारत और संपूर्ण विश्व राममय है।”
“यह धर्मध्वज इतिहास के सुंदर जागरण का रंग है”—PM मोदी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा: “यह धर्मध्वज केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है। इसका भगवा रंग और उस पर अंकित सूर्यवंश की थाती रामराज की कीर्ति को पुनः प्रतिष्ठित करता है।”
मोदी ने धर्मध्वज को ‘संकल्प’, ‘सिद्धि’ और ‘सदियों के संघर्ष की पराकाष्ठा’ बताया। उन्होंने कहा कि यह ध्वज संतों की साधना और समाज की सामूहिक सहभागिता का चरम रूप है।
धर्मध्वज: सत्य, वचन, आदर्श और रामराज्य का उद्घोष
प्रधानमंत्री ने कहा:
“यह ध्वज ‘सत्यमेव जयते’ की प्रतिध्वनि है।”
“यह ध्वज ‘प्राण जाए पर वचन न जाई’ की प्रेरणा है।”
“धर्मध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है और यह ‘कर्मप्रधान विश्व रचि राखा’ का संदेश देता है।”
उन्होंने बताया कि धर्मध्वज पर अंकित ॐ, सूर्यवंश का प्रतीक और कोविदार वृक्ष रामराज्य के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
🕉 “राम यानी जनता का सुख सर्वोपरि”—PM मोदी
मोदी ने श्रीराम के आदर्शों को परिभाषित करते हुए कहा:
“राम यानी जनता का सुख सर्वोपरि रखना।”
“राम यानी मर्यादा, आदर्श चरित्र और सर्वोच्च आचरण।”
उन्होंने कहा कि भारत आने वाले 1,000 वर्षों की नींव आज के संकल्पों से तैयार करेगा।
अयोध्या—भारत की सामूहिक चेतना का नया केंद्र
पीएम मोदी ने कहा कि राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत की सामूहिक शक्ति का प्रतीक बन रहा है:
यहां सप्त मंदिर निर्मित हैं
माता शबरी, निषादराज, अहिल्या, वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य और तुलसीदास को एक ही परिसर में स्थान दिया गया
जटायु और गिलहरी की मूर्तियां छोटे प्रयासों के महत्व का संदेश दे रही हैं
मोदी ने कहा कि: “हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं। उन्हें वंश नहीं, मूल्य प्रिय हैं। शक्ति नहीं, सहयोग महान लगता है।”
“सबका प्रयास—विकसित भारत का लक्ष्य 2047”
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में:
महिला
दलित
पिछड़े
आदिवासी
किसान
श्रमिक
युवा
हर वर्ग को राष्ट्रीय विकास के केंद्र में रखा गया है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का निर्माण “सबका प्रयास” से ही संभव होगा।
“अयोध्या—21वीं सदी का वैश्विक मॉडल”
मोदी ने कहा: “त्रेता युग की अयोध्या मर्यादा का केंद्र थी, 21वीं सदी की अयोध्या विकास का नया मॉडल बनेगी।”
उन्होंने बताया कि भविष्य की अयोध्या में:
आध्यात्म
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
सरयू की पवित्र धारा
आधुनिक विकास साथ-साथ प्रवाहित होंगे।
कोविदार वृक्ष और विरासत पर संदेश
कोविदार वृक्ष पर बात करते हुए पीएम ने कहा: “जब हम अपनी जड़ों से कट जाते हैं, तो वैभव पन्नों में खो जाता है। हमारा लक्ष्य है गुलामी की मानसिकता को बदलना।”उन्होंने 1835 में मैकॉले द्वारा भारतीय शिक्षा में किए गए हस्तक्षेप का उल्लेख करते हुए कहा कि 2035 में उसके 200 वर्ष पूरे होंगे और अगले 10 वर्षों में मानसिक गुलामी को समाप्त करने का लक्ष्य तय किया गया है।







