Sophia Firdous इस समय राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। 16 मार्च को हुए Rajya Sabha Voting के दौरान ओडिशा में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला, जहां कांग्रेस के तीन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में वोट दिया।
इस क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस-बीजद के संयुक्त उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस ने सख्त कदम उठाते हुए Sophia Firdous समेत तीनों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया।
क्या हुआ राज्यसभा चुनाव में?
ओडिशा में चार राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ था:
भाजपा ने 2 सीटें जीतीं
1 सीट भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को मिली
1 सीट बीजद के खाते में गई
इस दौरान कांग्रेस के तीन विधायकों—सोफिया फिरदौस, रमेश जेना और दशरथी गोमांगो—ने पार्टी लाइन से हटकर वोट किया, जिससे Cross Voting Case ने बड़ा रूप ले लिया।
पहले भी बागी तेवर दिखा चुकी थीं Sophia Firdous
सोफिया फिरदौस ने पहले ही कांग्रेस के बीजद के साथ संयुक्त उम्मीदवार के फैसले पर सवाल उठाए थे।उन्होंने कहा था कि जब उम्मीदवार बीजद का है, तो उसे “संयुक्त उम्मीदवार” कैसे कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी सभी को साथ लेकर नहीं चल रही, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है।
कौन हैं Sophia Firdous?
Sophia Firdous ओडिशा की बाराबती-कटक सीट से कांग्रेस विधायक हैं।
वह पूर्व विधायक Mohammad Moquim की बेटी हैं
सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई KIIT University से की
2024 में भाजपा उम्मीदवार को हराकर विधायक बनीं
ओडिशा की पहली मुस्लिम महिला विधायक के रूप में पहचान
इसके अलावा वह CREDAI और अन्य व्यावसायिक संगठनों से भी जुड़ी रही हैं।
बीजद में भी बगावत
इस चुनाव में सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, बल्कि बीजद के दो विधायकों—देवी रंजन त्रिपाठी और सोविक बिस्वाल—ने भी क्रॉस वोटिंग की। Naveen Patnaik ने इस पूरे मामले को लेकर भाजपा पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया।
कांग्रेस की सख्त कार्रवाई
ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने तीनों विधायकों को निलंबित करने की पुष्टि की है।
उन्हें पार्टी गतिविधियों से बाहर कर दिया गया
विधानसभा में अलग बैठने के निर्देश
निष्कासन पर भी विचार जारी
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामला सिर्फ एक क्रॉस वोटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है।साथ ही यह दिखाता है कि राज्यों में राजनीतिक समीकरण कितनी तेजी से बदल रहे हैं।







