मेरठ में मोहन भागवत का बयान: RSS का लक्ष्य सत्ता नहीं, हिंदू समाज का संगठन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने मेरठ में कहा कि संघ का उद्देश्य राजनीतिक सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना और व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र को मजबूत करना है। मोहन भागवत का बयान शुक्रवार को शताब्दी नगर स्थित माधव कुंज में देश-विदेश के करीब 950 खिलाड़ियों से संवाद के दौरान सामने आया।
‘संघ का लक्ष्य देश का नाम ऊंचा करना’
भागवत ने स्पष्ट कहा कि संघ अपना नाम बड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि देश का नाम ऊंचा करने के लिए कार्य करता है। उन्होंने दोहराया कि RSS किसी सत्ता, स्पर्धा या विरोध की भावना से प्रेरित नहीं है।
करीब 50 मिनट के संबोधन में उन्होंने संघ की लगभग 100 वर्षों की यात्रा का जिक्र करते हुए युवाओं से राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
‘हिंदू’ शब्द विविधता में एकता का प्रतीक
भारत की अवधारणा पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि देश केवल भौगोलिक सीमाओं से परिभाषित नहीं होता। भारत की आत्मा भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी की परंपराओं से प्रेरणा लेती है।
उन्होंने कहा कि ‘हिंदू’ शब्द किसी जाति का द्योतक नहीं, बल्कि विविधता में एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है। जब-जब सामाजिक एकता कमजोर हुई, तब-तब राष्ट्र को संकटों का सामना करना पड़ा।
समाज के चार स्तंभों का उल्लेख
संघ प्रमुख ने समाज के चार आधार—संस्कार, सनातन संस्कृति, धर्मभाव और सत्यनिष्ठा—का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संघ का मिशन व्यक्ति निर्माण के जरिए पूरे हिंदू समाज का संगठन है। स्वयंसेवक विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हैं।








