Lucknow: UGC Guidelines 2026 के समर्थन में बापसा का प्रदर्शन, कई छात्र हिरासत में
Lucknow में मंगलवार को बिरसा आंबेडकर फुले छात्र संगठन (BAPSA) उत्तर प्रदेश के बैनर तले UGC की गाइडलाइंस-2026 के समर्थन में जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारी Lucknow University के गेट पर एकत्र हुए और गेट नंबर-3 से परिवर्तन चौक तक समर्थन मार्च निकाला।
परिवर्तन चौक पहुंचने पर छात्रों ने बैठकर नारेबाजी की, जहां पुलिस से उनकी तीखी नोकझोंक हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने कई छात्रों को हिरासत में ले लिया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
धारा 144 को लेकर उठे सवाल
बापसा के उपाध्यक्ष आकाश कठेरिया ने आरोप लगाया कि दो दिन पहले UGC गाइडलाइंस के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान धारा 144 लागू नहीं थी, लेकिन अब समर्थन प्रदर्शन के दौरान इसे लागू कर दिया गया। उन्होंने कहा कि संगठन का प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और कई जिलों से छात्र लखनऊ पहुंच रहे हैं।बापसा का साफ कहना है कि UGC के नए नियमों को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।
आरक्षण और प्रतिनिधित्व को लेकर आरोप
छात्र संगठन का कहना है कि UGC Guidelines 2026 इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि उच्च शिक्षा संस्थानों में OBC, SC और ST वर्गों के साथ भेदभाव के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। संगठन ने शिक्षकों की नियुक्ति में Not Found Suitable (NFS) जैसे प्रावधानों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों में OBC प्रोफेसर न होने का दावा
प्रदर्शन के दौरान लगाए गए पोस्टरों में दावा किया गया कि जनवरी 2020 तक किसी भी केंद्रीय विश्वविद्यालय में एक भी OBC प्रोफेसर नियुक्त नहीं हुआ। संगठन ने इसे सामाजिक समानता के संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए UGC और केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
भेदभाव के मामलों में बढ़ोतरी का आरोप
बापसा का कहना है कि देशभर में OBC, SC और ST वर्गों के खिलाफ भेदभाव के मामलों में लगभग 118% तक बढ़ोतरी हुई है। साथ ही विश्वविद्यालयों में महिलाओं और आरक्षित वर्गों का शीर्ष पदों पर प्रतिनिधित्व बेहद कम बताया गया।
खाली पद तुरंत भरने की मांग
संगठन ने संसद में जुलाई 2025 में दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षित वर्गों के लिए स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा अब भी खाली है।बापसा ने मांग की है कि जब तक UGC Guidelines 2026 को पूरी तरह लागू नहीं किया जाएगा, तब तक उच्च शिक्षा में सामाजिक न्याय सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा।







