Khamenei Death Protests: UP में सबसे ज्यादा विरोध क्यों? Lucknow ‘Mini Iran’ कनेक्शन समझिए
अमेरिका-इजरायल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत की खबर के बाद उत्तर भारत के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। दिल्ली से कश्मीर तक लोगों ने इसे गैरकानूनी और अनैतिक बताते हुए प्रदर्शन किया।
हालांकि Khamenei Death Protests का सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला। लखनऊ, बाराबंकी, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, अमरोहा, जौनपुर, मेरठ और आजमगढ़ समेत कई शहरों में शिया समुदाय सड़कों पर उतरा और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ नारे लगाए।
तीन दिन का शोक, मजलिस और काला परचम
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने तीन दिवसीय शोक का ऐलान किया। मौलाना यासूब अब्बास ने लोगों से अपील की कि:
घरों पर काले झंडे लगाए जाएं
काले कपड़े पहनकर शोक व्यक्त किया जाए
रोजाना मजलिस (शोकसभा) आयोजित की जाए
कई शहरों में स्वैच्छिक बंद और कैंडल मार्च भी निकाले गए।
Lucknow Mini Iran: क्यों कहा जाता है?
Lucknow को अक्सर ‘Mini Iran’ या ‘शिराज-ए-हिंद’ कहा जाता है। इसकी वजह सिर्फ मौजूदा घटनाक्रम नहीं, बल्कि सदियों पुराना धार्मिक-सांस्कृतिक रिश्ता है।
ऐतिहासिक कारण:
लखनऊ के पहले नवाब Saadat Ali Khan I (ईरान के निशापुर से)
फारसी भाषा, शायरी और तहजीब का प्रभाव
ईरानी शैली की वास्तुकला
धार्मिक पहचान:
Bara Imambara
Chota Imambara
मुहर्रम के दौरान लखनऊ का माहौल ईरान जैसा दिखता है। शिया आबादी की बड़ी संख्या और अजादारी की परंपरा इसे खास बनाती है।
UP में क्यों सबसे ज्यादा असर?
भारत में शिया समुदाय की सबसे बड़ी आबादी उत्तर प्रदेश में है (अनुमानित 1 करोड़+)लखनऊ शिया धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है,ईरान के धार्मिक नेतृत्व से गहरा आध्यात्मिक जुड़ाव, शिया और सुन्नी दोनों समुदायों की भागीदारी








