KGMU से जुड़े लव जिहाद और धर्मांतरण मामले में आरोपी डॉक्टर रमीजुद्दीन उर्फ रमीज की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को कई अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल सबूतों से उसके तार प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
पुलिस के अनुसार, ठाकुरगंज इलाके से गिरफ्तारी के समय डॉ. रमीज के पास से एक नया मोबाइल फोन बरामद किया गया था। मोबाइल की शुरुआती जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। फोन में मौजूद चैट, कॉल डिटेल और डिजिटल डेटा से आरोपी की गतिविधियों और संपर्कों का खुलासा हुआ है, जिन्हें जांच के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
पुराना मोबाइल भी बरामद, डेटा डिलीट करने की कोशिश
जांच के दौरान पुलिस को डॉ. रमीज का एक पुराना मोबाइल फोन भी मिला है। जांच में सामने आया है कि इस फोन से जानबूझकर डेटा डिलीट किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि फरारी के दौरान आरोपी ने अपने संपर्कों और गतिविधियों के सबूत मिटाने की कोशिश की।
फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया मोबाइल
डिलीट किए गए डेटा को रिकवर कराने के लिए पुलिस ने मोबाइल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस का मानना है कि रिकवर होने वाला डेटा पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में मददगार साबित हो सकता है और साजिश में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
फरारी के दौरान PFI से संपर्क में रहा रमीज
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, फरारी के दौरान आरोपी डॉक्टर रमीज लगातार PFI के कई पदाधिकारियों के संपर्क में था। मोबाइल से मिले चैट और कॉल रिकॉर्ड इस ओर इशारा करते हैं कि रमीज ने न सिर्फ संगठन से संपर्क किया, बल्कि कानूनी मदद लेने की भी कोशिश की थी।
इन डिजिटल सबूतों के आधार पर अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपी को किस स्तर पर मदद मिली और क्या यह मामला किसी संगठित नेटवर्क या साजिश का हिस्सा है।
जांच का दायरा बढ़ा
मोबाइल से मिले अहम सुरागों के बाद लखनऊ पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अब यह केस केवल KGMU छात्रा से जुड़े आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे संभावित संगठित साजिश की भी गहन जांच की जा रही है।








