UP News: सहारनपुर में देवबंदी उलेमा और जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक काजी इसहाक गोरा ने मुसलमानों के सामाजिक और घरेलू हालात पर एक सख्त और दिल को झकझोर देने वाला बयान दिया है। उनका कहना है कि मुसलमानों के घरों में बढ़ती बदसुकूनी, बेचैनी और बरकत का खत्म होना किसी बाहरी कारण से नहीं, बल्कि घरों के भीतर फैल रही नाफरमानी और शोरगुल से जुड़ा है।काजी इसहाक गोरा ने कहा कि आज घरों में तिलावत, जिक्र और रूहानियत की जगहम्यूजिक, नाच–गाना, तेज डीजे और बेतहाशा आतिशबाजी ने ले ली है, जो अल्लाह की रहमत को दूर करने वाली सबसे बड़ी वजह है।
काजी साहब का कहना है कि मुसलमान अक्सर बाहरी हालात की शिकायत करते हैं, लेकिन समाज और घरों में बिगड़ते हालात का असली कारण— “अपनी जिंदगी में पैदा हुई खुराफातें और फिजूलखर्ची” है।
उन्होंने कहा कि—
शादियों में तेज संगीत
बैंड-बाजा और डीजे
रातभर आतिशबाजी के कारण सिर्फ फिजूलखर्ची नहीं बढ़ती, बल्कि राहगीरों, बीमारों, बच्चों और यहां तक कि परिंदों तक को तकलीफ पहुँचती है।
“जब घर ही नाफरमानी से भर जाए, रहमत कैसे उतरे?” — काजी
काजी इसहाक गोरा का साफ कहना है: “जब घर का माहौल अल्लाह की नाफरमानी से भर जाए, तो रहमत की उम्मीद कैसे की जा सकती है।”उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि—
शिकायतें छोड़ें
पहले अपने अंदर झांकें
घरों से नाच–गाना, शोर-शराबा और फिजूल रस्में हटाएँ
“इस्लाह की शुरुआत घर से होती है। जब कौम खुद को बदल लेती है, तो अल्लाह उसकी तकदीर भी बदल देता है।”
सोशल मीडिया पर वायरल बयान
काजी साहब का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। लोग इसे “वक्त की कड़ी चेतावनी” और सामुदायिक आत्ममंथन का संदेश बता रहे हैं।यह बयान मुसलमानों के भीतर धार्मिक अनुशासन और सामाजिक सुधार की चर्चा को तेज कर रहा है।








