उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड वरिष्ठ अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बड़ी ठगी का शिकार बना लिया। जालसाजों ने प्रदेश सरकार के वित्त विभाग से सेवानिवृत्त 73 वर्षीय अधिकारी को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 25 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और उनसे करीब ₹90 लाख की ठगी कर ली।
खुद को साइबर क्राइम अधिकारी बताकर किया डराने का खेल
ठगों ने खुद को मुंबई साइबर क्राइम सेल का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित के खिलाफ मुंबई के एक साइबर थाने में मामला दर्ज है और गिरफ्तारी वारंट जारी होने वाला है। जांच से बचने के लिए एक करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की बात कही गई, यह भरोसा दिलाते हुए कि रकम बाद में लौटा दी जाएगी।
डर के कारण ट्रांसफर किए ₹90 लाख
लगातार धमकियों और गिरफ्तारी के डर से बुजुर्ग अधिकारी ने:
UPI
RTGS
फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर
अलग-अलग खातों में करीब ₹90 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
जब पीड़ित ने सवाल उठाने की कोशिश की, तो ठगों ने पूरे परिवार को जेल भेजने की धमकी दी और व्हाट्सऐप पर फर्जी कोर्ट वारंट भी भेज दिया।
कई राज्यों के खातों में भेजी गई रकम
पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम कई राज्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से अधिकतर खाते:
ओडिशा
पश्चिम बंगाल
झारखंड
से जुड़े हो सकते हैं।
अब तक पुलिस ने ₹15 लाख की रकम फ्रीज करा दी है, जबकि अन्य खातों की गहन जांच जारी है।
बेटे की सतर्कता से खुला मामला
पीड़ित अधिकारी कानपुर रोड स्थित एलडीए कॉलोनी के निवासी हैं। 25 दिसंबर को बेटे को पिता की घबराहट पर शक हुआ, पूछताछ के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और फिर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि:
कोई भी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती
इस तरह की धमकी मिलने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करें
बैंक और व्यक्तिगत जानकारी किसी से साझा न करें








