उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने मुस्लिम महिलाओं के बुर्का और नकाब पहनने को लेकर एक बयान दिया है, जिसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को हर समय नकाब में रहना है, तो उन्हें घर के भीतर ही रहना चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार महिलाएं घर के अंदर अधिक असुरक्षित होती हैं, जबकि बाहर अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित रहती हैं।
यह बयान आगरा में आयोजित एक जनसुनवाई के दौरान सामने आया, जहां कई महिलाएं नकाब पहनकर अपनी समस्याएं लेकर पहुंची थीं।
पहचान और सुरक्षा को लेकर सवाल
महिला आयोग अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य सरकारी दस्तावेजों के लिए चेहरा दिखाया जाता है, तो फिर जनसुनवाई, अस्पताल या आयोग जैसे स्थानों पर पहचान क्यों छिपाई जाती है।
उनका कहना था कि जहां पहचान जरूरी है, वहां भी नकाब न हटाना समझ से परे है।
‘घर के भीतर महिलाएं ज्यादा असुरक्षित’
उन्होंने कहा कि उनके अनुभव में महिलाएं घरेलू माहौल में अधिक असुरक्षा का सामना करती हैं, जबकि बाहर समाज में उन्हें अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षा मिलती है।उन्होंने एक नागरिक और आयोग की अध्यक्ष के रूप में यह सवाल उठाया कि आखिर महिलाएं अपनी पहचान छिपाने की जरूरत क्यों महसूस करती हैं।
जनसुनवाई का उदाहरण
अध्यक्ष ने एक अन्य जनसुनवाई का उदाहरण देते हुए बताया कि अस्पताल में कई महिलाएं नकाब लगाकर बैठी थीं और शुरुआत में सरकारी सुविधाएं मिलने से इनकार कर रही थीं। हालांकि, जांच की बात सामने आने पर उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें योजनाओं का लाभ मिला था।







