हर साल बजट आते ही आम आदमी की नजर रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और मोबाइल बिल पर जाती है, लेकिन बजट 2026 के बाद इस बार चर्चा का सबसे गर्म मुद्दा कुछ और ही बन गया है—शराब के दाम। सवाल सीधा है कि जो बोतल कल तक 500 रुपये में मिल जाती थी, क्या अब वही बोतल जेब पर भारी पड़ने वाली है?
Budget 2026 के बाद क्यों गरमाई शराब की कीमतों पर बहस?
बजट 2026-27 पेश होने के बाद शराब और सिगरेट के दामों को लेकर बाजार में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजटीय ऐलानों के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—इस बार क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा?
असल में इस बजट में टैक्स से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किया गया है, जिसका सीधा असर शराब की कीमतों पर पड़ सकता है। भले ही शराब पर टैक्स लगाने का अधिकार राज्यों के पास हो, लेकिन केंद्र सरकार के फैसले इसकी लागत संरचना को प्रभावित करते हैं।
TCS बढ़ने से क्यों महंगी हो सकती है शराब?
बजट 2026-27 में सरकार ने शराब स्क्रैप और खनिजों की बिक्री पर लगने वाले TCS को 1% से बढ़ाकर 2% कर दिया है। देखने में यह बढ़ोतरी मामूली लग सकती है, लेकिन जब यह पूरी सप्लाई चेन पर लागू होती है, तो इसकी लागत आखिरकार ग्राहक तक पहुंचती है।
डिस्टिलरी → थोक व्यापारी → रिटेल दुकान हर स्तर पर बढ़ी हुई लागत धीरे-धीरे कीमत में जुड़ती चली जाती है।
राज्यों के फैसलों पर भी निर्भर करेंगे दाम
भारत में एक्साइज ड्यूटी और VAT तय करने का अधिकार राज्य सरकारों के पास होता है। इसी वजह से हर राज्य में शराब के दाम अलग-अलग होते हैं। बजट के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कई राज्य राजस्व बढ़ाने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बदलाव कर सकते हैं।
अगर राज्यों ने ऐसा किया, तो शराब की कीमतों में और इजाफा तय माना जा रहा है। यही वजह है कि अंतिम कीमत राज्य-दर-राज्य अलग हो सकती है।
500 की बोतल अब कितनी पड़ेगी?
मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, Budget 2026 के असर से शराब की कीमतों में करीब 5% से 10% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मतलब साफ है—
जो बोतल अभी 500 रुपये में मिल रही है,
उसकी कीमत बढ़कर 525 से 550 रुपये तक जा सकती है।
कुछ राज्यों में टैक्स ज्यादा बढ़ने की स्थिति में यह कीमत इससे भी ऊपर जा सकती है। हालांकि सटीक दाम राज्य सरकारों के अंतिम फैसलों के बाद ही साफ होंगे।








