Brain Rot आज की डिजिटल पीढ़ी के मानसिक स्वास्थ्य की कड़वी सच्चाई को बयान करने वाला शब्द बन चुका है। इसका शाब्दिक अर्थ है “दिमाग का सुस्त या कमजोर होना”। यह स्थिति लंबे समय तक सोशल मीडिया पर कम गुणवत्ता वाले, अर्थहीन और अत्यधिक उत्तेजक कंटेंट—जैसे रील्स और शॉर्ट वीडियो—देखने के कारण पैदा होती है।
रील स्क्रॉलिंग की यह आदत धीरे-धीरे व्यक्ति की सोचने, समझने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को प्रभावित करने लगती है, जिसे मानसिक गिरावट के शुरुआती संकेतों में गिना जाता है।
Oxford ने क्यों चुना ‘Brain Rot’ को Word of the Year?
इस शब्द की बढ़ती प्रासंगिकता को देखते हुए Oxford University Press ने वर्ष 2024 में ‘Brain Rot’ को Word of the Year घोषित किया। हालांकि यह शब्द सबसे पहले इंटरनेट स्लैंग के तौर पर सामने आया था, लेकिन अब यह डिक्शनरी का हिस्सा बन चुका है।
Brain Rot उस मानसिक स्थिति को परिभाषित करता है, जिसमें व्यक्ति की
एकाग्रता (Focus)
निर्णय लेने की क्षमता
गहरी सोच (Deep Thinking)
धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।
घंटों रील स्क्रॉल करने से दिमाग पर क्या असर पड़ता है?
जब कोई व्यक्ति लगातार रील्स स्क्रॉल करता है, तो मस्तिष्क जानकारी के अंतहीन प्रवाह में फंस जाता है। इसका नतीजा होता है—
मानसिक थकान (Cognitive Fatigue)
याददाश्त में कमी
ध्यान भटकने की आदत
गहरी सोच में कमी
यही वजह है कि लंबे समय तक रील देखने वाले लोगों में Short Attention Span की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
रील स्क्रॉलिंग और Dopamine Loop का साइंस
न्यूरोसाइंस रिसर्च के मुताबिक, रील्स का Short-Form Video Format मस्तिष्क में डोपामाइन का तेज और बार-बार रिलीज कराता है। इसे Variable Reward Schedule कहा जाता है—जो जुए की लत की तरह ही काम करता है।हर 10–15 सेकंड में नया वीडियो मिलने से दिमाग को तुरंत खुशी मिलती है। लेकिन इसका नकारात्मक असर यह होता है कि मस्तिष्क का Prefrontal Cortex—जो
निर्णय लेने
फोकस बनाए रखने
आत्म-नियंत्रण
के लिए जिम्मेदार होता है—धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है।








