मुरादाबाद निवासी सपा नेता युसूफ मलिक के खिलाफ भ्रामक अफवाह फैलाने और धार्मिक वैमनस्य बढ़ाने के आरोप में FIR दर्ज की गई है। यह मामला अब चर्चा का विषय बन गया है।पुलिस के अनुसार, युसूफ मलिक ने 14 मार्च को रामपुर जेल में Azam Khan और उनकी पत्नी Tazeen Fatima से मुलाकात की थी। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया से दावा किया कि आजम खान ने मुस्लिम समाज से ईद सादगी से मनाने, काले कपड़े पहनने और काली पट्टी बांधने की अपील की है।
क्या है पूरा विवाद?
युसूफ मलिक ने अपने बयान में कहा कि यह अपील ईरान पर हमले में स्कूली बच्चियों की मौत के विरोध में की गई है। उन्होंने इसे Iran-Israel Conflict News से जोड़ते हुए मुस्लिम समुदाय से ईद पर खुशियां न मनाने की बात कही।
हालांकि, प्रशासन ने इस बयान को भ्रामक और समाज में तनाव फैलाने वाला माना है। पुलिस का कहना है कि इस तरह के वायरल संदेश से भ्रम और असंतोष फैल सकता है।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए गंज थाने में मामला दर्ज कर लिया है।अपर पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि:
यह बयान समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश माना गया
धार्मिक आधार पर लोगों को उकसाना गंभीर अपराध है
युसूफ मलिक के खिलाफ बीएनएस की धारा 196(1), 153(2) और 57 के तहत केस दर्ज किया गया है।
आगे क्या होगा?
पुलिस फिलहाल वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और आरोपी की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
क्यों बना बड़ा मुद्दा?
यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि Viral Message Case और धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़ा मुद्दा बन गया है।इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट और उसके प्रभाव को लेकर बहस छेड़ दी है।







