Ayodhya News: राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे डॉ. रामविलास वेदांती का निधन, अयोध्या पहुंचेगा पार्थिव शरीर
राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे और अयोध्या से पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार सुबह निधन हो गया। वे 77 वर्ष के थे। उन्होंने मध्य प्रदेश के रीवा में अंतिम सांस ली।कथा महोत्सव के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
उनके निधन से अयोध्या, संत समाज और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। डॉ. वेदांती का पार्थिव शरीर देर शाम अयोध्या लाया जाएगा, जहां मंगलवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा।
90 के दशक में हिंदुत्व राजनीति का बड़ा चेहरा
1990 के दशक में डॉ. रामविलास वेदांती बीजेपी और हिंदुत्व राजनीति के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे।राम मंदिर आंदोलन के दौरान वे उन चेहरों में शामिल रहे, जिन्होंने देशभर में इस आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया।6 दिसंबर 1992 के बाबरी विध्वंस मामले में जिन नेताओं पर आरोप लगे थे, उनमें डॉ. वेदांती का नाम भी शामिल रहा। हालांकि बाद में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
कौन थे डॉ. रामविलास वेदांती
डॉ. रामविलास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को मध्य प्रदेश के रीवा में हुआ था।उन्होंने महज 12 साल की उम्र में संन्यास ले लिया और घर-परिवार छोड़कर अयोध्या आ गए।अयोध्या में वे हनुमानगढ़ी के महंत अभिराम दास के शिष्य बने।संस्कृत के प्रकांड विद्वान माने जाने वाले वेदांती सरयू तट स्थित हिंदू धाम में रहते थे, जहां उनका ‘वशिष्ठ भवन’ नामक आश्रम भी है।
राम मंदिर आंदोलन की धुरी बने वेदांती
1980 के दशक में स्वामी परमहंस, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह और विनय कटियार जैसे नेताओं के साथ डॉ. वेदांती राम मंदिर आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के नेता बने।उन्होंने देश और प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर राम मंदिर आंदोलन की अलख जगाई, जिससे उन्हें एक मजबूत और प्रभावशाली पहचान मिली।इसी भूमिका के चलते उन्हें राम जन्मभूमि न्यास का कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाया गया।
संत से सियासत तक का सफर
डॉ. रामविलास वेदांती का जीवन संत से सियासत तक का अनोखा सफर रहा।राम मंदिर आंदोलन से मिली पहचान के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा।1996 में बीजेपी ने उन्हें मछलीशहर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव जीतकर सांसद बने।इसके बाद 1998 में प्रतापगढ़ सीट से फिर सांसद चुने गए।इस तरह वे दो बार लोकसभा सांसद रहे।
बाबरी विध्वंस मामले में बयान
बाबरी विध्वंस केस में अदालत के फैसले से पहले दर्ज अपने बयान में डॉ. वेदांती ने कहा था—
“हमने किसी मस्जिद को नहीं, मंदिर के खंडहर को तोड़ा था। वहां केवल मंदिर था, जिसे राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था। रामलला वहीं विराजमान थे। खंडहर हटाकर मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया, जिसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने पूरा किया।”








