आशुतोष महाराज कौन हैं? स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO केस दर्ज कराने वाला शामली का हिस्ट्रीशीटर
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ प्रयागराज के झूंसी थाने में POCSO एक्ट समेत कई धाराओं में FIR दर्ज की गई है।एडीजे रेप एंड POCSO स्पेशल कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज इस मुकदमे में IPC की धारा 351(2) और POCSO एक्ट की धारा 3, 4(2), 5, 6, 16 और 17 शामिल हैं।इस मामले में शिकायतकर्ता के तौर पर सामने आए हैं आशुतोष महाराज, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड भी चर्चा में है।
कौन हैं आशुतोष महाराज?
आशुतोष महाराज का असली नाम आशुतोष पांडे (उर्फ अश्विनी) बताया जाता है। वे उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र के निवासी हैं।कांधला थाने में उनकी हिस्ट्रीशीट (संख्या 76A) खुली हुई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उनके खिलाफ गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट, गोवध अधिनियम, आईटी एक्ट समेत कुल 21 मुकदमे दर्ज रहे हैं।
ये मुकदमे शामली के अलावा लखनऊ और गोंडा जिलों में भी दर्ज बताए जाते हैं। हालांकि, कई मामलों में उन्हें कोर्ट से राहत भी मिल चुकी है और कुछ मामलों में पुलिस ने जांच में आरोपी नहीं बनाया।
नाम बदलने की कहानी
साल 2022 से पहले वे आशुतोष पांडे के नाम से जाने जाते थे। बाद में उन्होंने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य से दीक्षा ली और अपना नाम बदलकर आशुतोष महाराज रख लिया।बताया जाता है कि वे पहले भी शामली, गोंडा और मुजफ्फरनगर से जेल जा चुके हैं।
2012 में घूसकांड में गिरफ्तारी
दिसंबर 2012 में गोंडा के तत्कालीन एसपी नवनीत राणा को पशु तस्करी के मामले में कथित तौर पर एक लाख रुपये की घूस देने की कोशिश में आशुतोष महाराज और उनके साथियों को गिरफ्तार किया गया था।यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था।
मौनी अमावस्या पर शुरू हुआ विवाद
18 जनवरी को मौनी अमावस्या के मौके पर स्नान को लेकर आशुतोष महाराज और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद सामने आया था।आशुतोष ने स्वामी के शिष्यों पर मारपीट का आरोप लगाया था। हालांकि, उस समय कोर्ट में अर्जी दाखिल होने के बावजूद FIR दर्ज नहीं हुई थी।बाद में झूंसी थाने में दर्ज FIR में आशुतोष ने दावा किया कि उसी मारपीट के दौरान स्वामी के शिष्य उनके पास आए और अपनी आपबीती बताई।
पैसे का प्रलोभन देने का आरोप
इस बीच शाहजहांपुर के एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि आशुतोष महाराज के लोगों ने उन्हें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर नाबालिग बेटी से जुड़े यौन शोषण का मामला दर्ज कराने के लिए पैसे का लालच दिया।हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।








