Allahabad High Court ने Live-in Relationship Law को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि शादीशुदा पुरुष का किसी वयस्क महिला के साथ सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना अपराध नहीं है।
Court Observation: कानून और नैतिकता अलग
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सामाजिक नैतिकता नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के न्यायालय के कर्तव्य पर हावी नहीं हो सकती। यदि किसी कार्य को कानून अपराध नहीं मानता, तो केवल नैतिक आधार पर उसे अपराध नहीं कहा जा सकता।
सुरक्षा देने का आदेश
मामला एक ऐसे कपल का था, जो लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है और महिला के परिवार से धमकियों और ऑनर किलिंग के खतरे का सामना कर रहा था।
कोर्ट ने:
कपल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया
पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी
परिवार को किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप या नुकसान पहुंचाने से रोका
SSP को सौंपी जिम्मेदारी
कोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों की सुरक्षा करना पुलिस का कर्तव्य है। संबंधित जिले के पुलिस प्रमुख को कपल की सुरक्षा के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया गया।साथ ही, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पहले दी गई शिकायत पर पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।
Supreme Court Judgment का हवाला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में Shakti Vahini vs Union of India (2018) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऑनर किलिंग और पारिवारिक हिंसा से सुरक्षा देना राज्य का दायित्व है।






