Allahabad High Court में आज स्वामी Avimukteshwaranand Saraswati से जुड़े POCSO केस पर महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। यह कार्यवाही उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर केंद्रित है और इसे पूरे मामले का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।अदालत में आज यह स्पष्ट हो सकता है कि आरोपी पक्ष को अंतरिम राहत मिलेगी या गिरफ्तारी की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
क्या है पूरा मामला?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, जो शंकराचार्य पद से जुड़े हैं, उनके खिलाफ वेदपाठी छात्रों के कथित यौन शोषण के आरोप सामने आए हैं।शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया कि यह घटनाएं एक संगठित व्यवस्था के तहत लंबे समय से होती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि करीब 20 संभावित पीड़ित सामने आने को तैयार हैं।
मामला अदालत पहुंचने के बाद कोर्ट ने पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने का निर्देश दिया। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में POCSO एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया।
आरोपी पक्ष का जवाब
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके समर्थकों ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह पूरा मामला उन्हें बदनाम करने की साजिश है।उन्होंने कहा कि जिन बच्चों का जिक्र किया जा रहा है, वे उनके छात्र नहीं हैं और आरोप राजनीतिक या धार्मिक कारणों से प्रेरित हो सकते हैं।उनके वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर आज सुनवाई होनी है।
मठ और ग्राउंड रियलिटी
वाराणसी के केदार घाट स्थित श्री विद्या मठ को लेकर भी आरोपों की जांच की जा रही है। मठ प्रशासन के प्रतिनिधियों ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि परिसर में गुरुकुल, छात्रावास और सत्संग स्थल संचालित होते हैं।मठ की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जिस “स्विमिंग पूल” की चर्चा हो रही है, वह पूर्व शंकराचार्य के लिए बनाई गई जल संरचना थी, जिसका वर्तमान में उपयोग नहीं हो रहा।
कथित पीड़ितों के दावे
कुछ बटुकों ने मीडिया के सामने आकर अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया।हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
पलटवार और कानूनी कार्रवाई
एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से POCSO कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई, जिसमें एफआईआर को झूठा और भ्रामक बताया गया है।याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि एफआईआर में कथित पीड़ितों की पहचान उजागर की गई, जो कानूनन प्रतिबंधित है। इस मामले में अगली सुनवाई 13 मार्च को निर्धारित है।








