बरेली से लखनऊ पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री, पुलिस का कड़ा पहरा; बोले– मौखिक आदेश पर किया गया जिलाबदर
26 जनवरी को इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को बुधवार देर रात प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में बरेली से लखनऊ पहुंचा दिया। उन्हें लखनऊ के आलमबाग इलाके में स्थित उनके एक मित्र के आवास पर छोड़ा गया, जहां रात से ही पुलिस का कड़ा पहरा लगा हुआ है।
लखनऊ पहुंचने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि बरेली प्रशासन ने उन्हें सुनियोजित तरीके से शहर से बाहर भेजा। उन्होंने कहा कि मौखिक आदेश के आधार पर उन्हें जिलाबदर किया गया, जबकि बरेली में ऐसा कोई ठोस घटनाक्रम नहीं था, जिससे वहां से हटाने की आवश्यकता पड़ती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को उनका इस्तीफा स्वीकार करने या न करने का पूरा अधिकार है, लेकिन जानबूझकर उन्हें बरेली में नहीं रहने दिया गया। उनका कहना था कि प्रशासनिक दबाव के चलते उन्हें वहां से हटाया गया।
सनातन संस्कृति का मुद्दा बना कारण?
अलंकार अग्निहोत्री ने बताया कि माघ मेले के दौरान उन्होंने सनातन संस्कृति के कथित अपमान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इसी सिलसिले में उनकी बातचीत शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से हुई, जिन्होंने उन्हें आशीर्वाद देने के साथ आश्रम आने का निमंत्रण भी दिया।
आगे की रणनीति पर बोले
अपने अगले कदम को लेकर उन्होंने कहा कि वे अब अपनी रणनीति को और मजबूत करेंगे और स्वर्ण समाज से जुड़े विभिन्न संगठनों के संपर्क में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जनप्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे और आदेश मिलने पर ही सक्रिय होते हैं।
राजनीतिक समर्थन और सुरक्षा पर बयान
इस्तीफे को राजनीतिक कदम बताए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया कि जब सनातन संस्कृति के प्रतीकों पर हमला और बटुक ब्राह्मणों के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आईं, तब जनप्रतिनिधि चुप क्यों रहे।
उन्होंने यह भी बताया कि यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय सहित कई नेताओं ने उनसे संपर्क कर समर्थन जताया है।








