वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार करने वाले मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी को लेकर अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा— “क्या गंगा में रोजा इफ्तार नहीं कर सकते?” उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे कदम समाज में दूरियां बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे हैं।
लखनऊ में आयोजित एक इफ्तार पार्टी में पहुंचे अखिलेश यादव ने प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि डीएम, एसपी और एसओ को भी इफ्तारी में शामिल होना चाहिए था। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा— “हथेली गरम तो पुलिस नरम, शायद ऐसा नहीं हुआ इसलिए कार्रवाई हुई।”
दरअसल, सोमवार को वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर कुछ युवकों ने इफ्तार पार्टी आयोजित की थी। इस दौरान फल, मेवे और चिकन बिरयानी परोसी गई। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। इसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया।
इस पूरे मामले पर भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगा की पवित्रता का विशेष महत्व है और सनातन धर्म में इसे मां का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे कार्यों से बचना चाहिए जो धार्मिक भावनाओं को आहत करें और कानून अपना काम कर रहा है।
वहीं, बनारस की अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने भी इस घटना की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस्लाम में इफ्तार एक धार्मिक प्रक्रिया है, जिसे किसी भी तरह की पिकनिक या सैर की तरह नहीं किया जा सकता। उन्होंने ऐसे कृत्य को अनुचित बताते हुए कहा कि इससे धर्म की गलत छवि बनती है।
Ganga Iftar Controversy अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बनी हुई है। एक ओर प्रशासनिक कार्रवाई को सही ठहराया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। फिलहाल, यह मामला कानून, आस्था और राजनीति के बीच संतुलन की बहस को और तेज कर रहा है।








