राहुल गांधी सुल्तानपुर कोर्ट में पेश, अमित शाह मानहानि केस में बयान दर्ज
कांग्रेस नेता राहुल गांधी यूपी के सुल्तानपुर की MP/MLA कोर्ट में गृह मंत्री अमित शाह पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि केस में पेश हुए। कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया था।
दिल्ली से लखनऊ, फिर सुल्तानपुर रवाना
राहुल गांधी सुबह करीब 9:30 बजे दिल्ली से लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे। यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। मीडिया ने बातचीत की कोशिश की, लेकिन राहुल बिना बयान दिए हाथ हिलाते हुए सीधे सुल्तानपुर के लिए रवाना हो गए।उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि राहुल गांधी की कोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य थी। वहीं, कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने इसे भाजपा द्वारा दर्ज “राजनीतिक मुकदमा” बताया।
सुल्तानपुर कोर्ट के बाहर ‘सत्यमेव जयते’ पोस्टर
राहुल गांधी की पेशी से पहले सुल्तानपुर कोर्ट परिसर के बाहर उनके पोस्टर लगाए गए। पोस्टर पर राहुल की तस्वीर के साथ ‘सत्यमेव जयते’ लिखा गया। ये पोस्टर कांग्रेस नेता वीपी सिंह द्वारा लगवाए गए बताए जा रहे हैं।
राहुल गांधी की पेशी को देखते हुए कोर्ट की सुरक्षा बढ़ा दी गई। ASP अखंड प्रताप सिंह ने पुलिस बल के साथ सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
क्या है पूरा मामला? (8 साल पुराना केस)
यह मामला 2018 का है। आरोप है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “जो पार्टी ईमानदारी की बात करती है, उसका अध्यक्ष हत्या का आरोपी है।”
इस बयान के बाद भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को सुल्तानपुर कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।कोर्ट ने 19 जनवरी को राहुल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया था। इससे पहले दिसंबर 2023 में गैर-जमानती वारंट भी जारी हुआ था। बाद में 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी ने कोर्ट में सरेंडर कर जमानत ली थी। उन्हें 25-25 हजार रुपये के दो बॉन्ड पर जमानत मिली थी।
किन धाराओं में केस दर्ज?
राहुल गांधी पर IPC की धारा 499 और 500 के तहत मामला दर्ज है।
धारा 499 – मानहानि की परिभाषा
धारा 500 – मानहानि के लिए दंड (अधिकतम 2 वर्ष की सजा)
शिकायतकर्ता ने क्या कहा?
भाजपा नेता विजय मिश्रा के वकील के अनुसार, राहुल गांधी के बयान से उनके मुवक्किल की भावनाएं आहत हुईं और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। सबूत के तौर पर यूट्यूब वीडियो और मीडिया रिपोर्ट्स कोर्ट में पेश की गईं।








