पुलकित गर्ग, जो वर्तमान में चित्रकूट के जिलाधिकारी हैं, इन दिनों अपने एक फैसले को लेकर चर्चा में हैं। जहां आमतौर पर सक्षम परिवार अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट प्ले स्कूलों में दाखिला दिलाना पसंद करते हैं, वहीं IAS अधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी साढ़े तीन साल की बेटी का दाखिला सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराकर एक अलग मिसाल पेश की है।उनके इस फैसले को सरकारी शिक्षा और आंगनबाड़ी व्यवस्था पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
कई विकल्प देखने के बाद लिया फैसला
बतौर जिलाधिकारी चित्रकूट में यह पुलकित गर्ग की पहली तैनाती है। पद संभालने के बाद जब बेटी के प्ले-स्कूल एडमिशन की बारी आई, तो उन्होंने इसे केवल औपचारिकता नहीं माना। एक जागरूक अभिभावक की तरह उन्होंने अपनी पत्नी के साथ जिले के कई निजी प्ले स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों का दौरा किया।
फैसला लेने से पहले:
बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाएं
शिक्षण माहौल
एक्टिविटीज और देखभाल व्यवस्था
सीखने के तरीके
जैसे सभी पहलुओं को परखा गया। इसके बाद जिला मुख्यालय स्थित आंगनबाड़ी केंद्र को सबसे उपयुक्त पाया गया।
अन्य बच्चों की तरह जमीन पर बैठकर पढ़ती-खाती है बेटी
जिस आंगनबाड़ी केंद्र में दाखिला कराया गया है, वहां लगभग 35 बच्चे पंजीकृत हैं। DM की बेटी भी अन्य बच्चों की तरह:
ग्रुप एक्टिविटीज में हिस्सा लेती है
खेल-खेल में पढ़ाई करती है
और मध्याह्न भोजन के समय सबके साथ जमीन पर बैठकर खाना खाती है
केंद्र में रंगीन दीवारें, तस्वीरें, खिलौने, एजुकेशन किट, ABC-नंबर चार्ट जैसे संसाधन मौजूद हैं, जो प्रारंभिक शिक्षा को रोचक बनाते हैं।
हाई फीस नहीं, सही माहौल जरूरी: पुलकित गर्ग
IAS पुलकित गर्ग का कहना है कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूती बड़ी बिल्डिंग्स या महंगी फीस से नहीं, बल्कि सही माहौल, देखभाल और एक्टिविटीज से आती है। प्ले-स्कूल और प्री-स्कूल स्तर की शिक्षा बच्चे के मानसिक और सामाजिक विकास में अहम भूमिका निभाती है।
उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में:
इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
शिक्षण सामग्री
और कार्यकर्ताओं की नियमित ट्रेनिंग
पर लगातार काम किया जा रहा है।
स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा पर विशेष फोकस
आंगनबाड़ी केंद्रों में 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों के:
स्वास्थ्य
पोषण
और मानसिक विकास
पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कार्यकर्ताओं को तय शेड्यूल के अनुसार कहानियां, भावगीत, खेल गतिविधियां और बुनियादी शिक्षा देने के निर्देश होते हैं।
प्रशासनिक संदेश भी है यह फैसला
पुलकित गर्ग का यह कदम केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि प्रशासनिक संदेश भी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य जिले की सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड करना है। जहां जरूरत होगी, वहां मरम्मत, नवीनीकरण और संसाधन बढ़ाए जाएंगे।
स्थानीय लोगों ने की जमकर सराहना
स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने इस फैसले की सराहना की है। उनका कहना है कि जब जिले का शीर्ष अधिकारी खुद अपने बच्चे को आंगनबाड़ी भेजता है, तो इससे व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है और समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है।








