आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में हम अपनी छोटी-छोटी हेल्थ हैबिट्स पर ध्यान नहीं दे पाते। ऑफिस हो, घर हो या बाहर—अक्सर लोग खड़े-खड़े ही पानी पी लेते हैं। हमें लगता है कि इसमें भला क्या नुकसान होगा, लेकिन आयुर्वेद और सेहत से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, पानी पीने का तरीका उतना ही अहम है जितना पानी पीना।
खड़े होकर पानी पीने से क्या होता है?
जब हम बैठकर आराम से पानी पीते हैं, तो शरीर को उसे धीरे-धीरे सोखने और सही तरीके से इस्तेमाल करने का समय मिलता है। वहीं खड़े होकर पानी पीने से पानी तेज़ी से नीचे चला जाता है, जिससे शरीर उसे सही तरह से उपयोग नहीं कर पाता। इसका असर धीरे-धीरे सेहत पर दिखने लगता है।
आयुर्वेद क्या कहता है?
आयुर्वेद के अनुसार, खड़े होकर पानी पीने से शरीर का जल संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसा माना जाता है कि पानी सही जगह इस्तेमाल होने के बजाय जोड़ों और घुटनों के आसपास जमा होने लगता है।
इससे कम उम्र में ही
घुटनों में दर्द
जोड़ों में अकड़न
चलने-फिरने में परेशानी
जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।
किडनी पर पड़ सकता है असर
आयुर्वेदिक मान्यता के अनुसार, बैठकर पानी पीने पर शरीर पानी को “छानकर” आगे भेजता है। लेकिन खड़े होकर पानी पीने से पानी बिना फिल्टर हुए सीधे किडनी तक पहुंच जाता है, जिससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
लंबे समय तक यह आदत बनी रहे, तो
किडनी पर स्ट्रेस
यूरिन से जुड़ी समस्याएं
शरीर में मिनरल बैलेंस बिगड़ना
जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
पानी पीने का सही तरीका क्या है?
हमेशा बैठकर और आराम से पानी पिएं
एक-साथ बहुत ज़्यादा पानी न पिएं
छोटे-छोटे घूंट लें
पानी पीते समय शरीर और मन शांत रखें








