उत्तर प्रदेश में 1 फरवरी से लागू हुए पान मसाला उद्योग के नए नियमों ने पूरे सेक्टर की कार्यप्रणाली को कड़े निगरानी दायरे में ला दिया है। अब तक किसी तरह की अनियमितता, टैक्स चोरी या नियम उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई मुख्य रूप से फैक्टरी चला रही फ्रेंचाइजी पर होती थी, लेकिन नए नियमों के तहत अब पान मसाला ब्रांड के मालिक भी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे।
Pan Masala Rule UP से बढ़ी जवाबदेही
नए प्रावधानों के लागू होने के बाद पान मसाला उद्योग में जवाबदेही का दायरा काफी बढ़ गया है। बड़ी राष्ट्रीय कंपनियों से लेकर क्षेत्रीय और मध्यम स्तर के ब्रांड तक सतर्क हो गए हैं।असल में पान मसाला निर्माण में अक्सर मशीन और ब्रांड का मालिक एक ही होता है, लेकिन व्यवहार में मशीनें फ्रेंचाइजी को किराये पर देकर उत्पादन कराया जाता है। पुराने नियमों में मशीन संचालित करने वाली फ्रेंचाइजी को ही जिम्मेदार माना जाता था।
डमी फ्रेंचाइजी पर शिकंजा
नए नियमों के बाद जांच एजेंसियों को यह अधिकार मिल गया है कि वे यह भी जांच कर सकें कि कहीं ब्रांड मालिक ने डमी फ्रेंचाइजी व्यवस्था के जरिए किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर उत्पादन तो नहीं करवा रखा है।
यदि जांच में ऐसा पाया जाता है, तो सीधे असली मालिक पर कार्रवाई की जा सकेगी। यह बदलाव कर चोरी और बेनामी संचालन पर रोक लगाने के उद्देश्य से किया गया है।
छोटे निर्माताओं में भ्रम
हालांकि नियमों के लागू होने के बाद भी मैनुअल और गैर-मैनुअल यूनिट्स को लेकर कुछ अस्पष्टता बनी हुई है।कई छोटे निर्माता सवाल उठा रहे हैं कि पारंपरिक इकाइयों पर इन नियमों को किस तरह लागू किया जाएगा। इसके साथ ही उद्योग में यह चिंता भी है कि जीएसटी और जांच एजेंसियों को मिले अतिरिक्त अधिकारों से भ्रष्टाचार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
सहायक इकाइयों पर भी सख़्ती
नए नियमों के तहत पान मसाला से जुड़ी घोषित और अघोषित एनसिलरी यूनिट्स को भी जांच के दायरे में लाया गया है। इनमें शामिल हैं—
कच्चे माल की प्रोसेसिंग
पैकेजिंग यूनिट
प्रिंटिंग
फ्लेवर मिक्सिंग
अब इन सभी गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी।








