लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती को लेकर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी भर्ती प्रक्रिया में घोटाले का आरोप लगाते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव करने जा रहे थे, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया।
पुलिस रोकते ही बढ़ा तनाव, बैनर फाड़ने का आरोप
जैसे ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों का रास्ता रोका, दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने उनके बैनर फाड़ दिए। हालात को काबू में करने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
शरीर पर लिखे नारे, आरक्षण को लेकर नाराजगी
सोमवार सुबह करीब 11 बजे पहुंचे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हाथों और शरीर पर नारे लिखे हुए थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि UGC से जुड़े मामलों पर एक दिन में फैसला हो जाता है, जबकि 69 हजार शिक्षक भर्ती का मामला 10 महीनों से अटका हुआ है।
‘UGC पर 1 दिन, शिक्षक भर्ती पर 10 महीने’
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि अलग-अलग मामलों में फैसलों की गति में भेदभाव किया जा रहा है। उनका कहना था कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि यह भर्ती हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी है।
बसों में भरकर हटाए गए प्रदर्शनकारी
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने एक-एक प्रदर्शनकारी को पकड़कर बसों में बैठाया और उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाया। इस दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया पर सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के लिए न्यायसंगत समाधान नहीं किया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ और इसी के खिलाफ वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं।








