प्रयागराज की हालिया घटना को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। इसी क्रम में लखनऊ में शरद शुक्ला की ओर से एक होर्डिंग लगाई गई है, जिसमें धार्मिक और नैतिक संदर्भों के जरिए सरकार पर निशाना साधा गया है।
होर्डिंग में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को ‘परमाराध्य’ बताते हुए उन्हें कोटिशः प्रणाम किया गया है। पोस्टर में मनुस्मृति और रामचरितमानस के श्लोकों का उल्लेख है। मनुस्मृति के श्लोक के जरिए गुरु या वेदाचार्य के अपमान के दुष्परिणामों की बात कही गई है, जबकि रामचरितमानस की पंक्तियों में लिखा गया है कि “जब प्रभु की कृपा हटती है, तो पहले बुद्धि हर ली जाती है।”
कांग्रेस ने बताया नैतिक और धार्मिक मुद्दा
कांग्रेस नेता शरद शुक्ला ने साफ कहा कि वे शंकराचार्य के सम्मान और सनातन परंपराओं के पक्ष में खड़े हैं और किसी भी तरह के अपमान को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने प्रयागराज की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में वैमनस्य फैलाने का काम करती हैं।
शंकराचार्य को संगम जाने से रोकने का आरोप
शरद शुक्ला ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रयागराज संगम जाने से रोका, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए धार्मिक और नैतिक मूल्यों की याद दिलाई।
अयोध्या विधानसभा से जुड़ा सियासी संकेत
शरद शुक्ला भारतीय युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और अयोध्या विधानसभा क्षेत्र से जुड़े हैं। होर्डिंग के जरिए उन्होंने संकेत दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। पार्टी नेताओं का मानना है कि प्रयागराज की घटना से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और सार्वजनिक प्रतिक्रिया जरूरी थी।








