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Unnao Rape Case: 250 टांके, हाथ-पैर में रॉड

Unnao Rape Case: हाई कोर्ट के आदेश से फिर हरे हुए पीड़िता के जख्म, बोलीं– शरीर में 250 टांके, कोर्ट की बहस समझ नहीं आई यूपी का उन्नाव रेप केस, जिसने कभी पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह है दिल्ली हाई कोर्ट का हालिया […]

Unnao Rape Case: 250 टांके, हाथ-पैर में रॉड

Unnao Rape Case: हाई कोर्ट के आदेश से फिर हरे हुए पीड़िता के जख्म, बोलीं– शरीर में 250 टांके, कोर्ट की बहस समझ नहीं आई

यूपी का उन्नाव रेप केस, जिसने कभी पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह है दिल्ली हाई कोर्ट का हालिया आदेश, जिसमें आरोपी पूर्व विधायक को जमानत दिए जाने की बात कही गई है। इस फैसले ने पीड़िता के पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है।इस आदेश के बाद पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में अपने दर्द, गुस्से और डर को खुलकर बयां किया।

‘मेरे शरीर में 250 टांके, हाथ-पैर में रॉड… फिर भी घसीटा गया’

पीड़िता ने आरोप लगाया कि इंडिया गेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया।
उनका कहना है कि “मेरे पूरे शरीर में करीब 250 टांके हैं, हाथ-पैर में रॉड लगी है। फिर भी मुझे जबरन गाड़ी में डाला गया, खींचा गया और धक्का दिया गया। मुझे बहुत दर्द हुआ।”

कोर्ट में खुद को बेबस महसूस किया

दिल्ली हाई कोर्ट में मौजूद रहने के अनुभव को साझा करते हुए पीड़िता ने कहा कि “मैं कोर्ट में थी, फैसला सुन रही थी। विरोध करना चाहती थी, लेकिन पूरी बहस अंग्रेजी में हो रही थी। अगर बहस हिंदी में होती, तो शायद मैं पूछ पाती कि मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ।”

उनका कहना है कि इस प्रक्रिया ने उन्हें यह एहसास कराया कि आम लोगों, खासकर गरीब और पीड़ित महिलाओं के लिए न्याय कितना जटिल और दूर हो गया है।

‘इतना टूटी कि सुसाइड का ख्याल आया’

फैसले के बाद की मन:स्थिति पर बात करते हुए पीड़िता भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “मुझे इतना दुख हुआ कि लगा मैं सुसाइड कर लूं। लेकिन फिर बच्चों को देखा, परिवार को सोचा। मरने से इंसाफ नहीं मिलेगा। अगर भगवान ने जिंदा रखा है, तो शायद संघर्ष के लिए।”

सुरक्षा हटने का आरोप, परिवार डर के साए में

पीड़िता ने आरोप लगाया कि जमानत की प्रक्रिया के दौरान और उसके बाद परिवार, पैरोकारों और गवाहों की सुरक्षा धीरे-धीरे हटा ली गई। उनका कहना है कि कई बार पुलिस और कोर्ट से गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

‘आज मेरे साथ हुआ, कल मेरी बेटी के साथ हो सकता है’

भविष्य को लेकर पीड़िता का डर साफ झलकता है। उन्होंने कहा, “आज मेरे साथ हुआ है, कल मेरी बेटी या बेटे के साथ हो सकता है। मैं मां हूं, मैंने झेल लिया, लेकिन मेरी बेटी कैसे झेलेगी?” उनका मानना है कि यह फैसला सिर्फ उन्हें नहीं, बल्कि न्याय की उम्मीद रखने वाली हर बेटी को डरा गया है।

इंडिया गेट प्रदर्शन और पुलिस पर गंभीर आरोप

पीड़िता का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान उन्हें करीब एक घंटे तक रोके रखा गया और दबाव बनाया गया कि वह आरोपी के खिलाफ न बोलें।उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर नशे में ड्यूटी करने का आरोप भी लगाया।

‘पैसे और ताकत के आगे सिस्टम कमजोर’

पीड़िता का कहना है कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उनके मुताबिक, “पैसे में बहुत ताकत होती है। सिर्फ सुरक्षा बलों की तैनाती से भरोसा नहीं होता।”

अब सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला

पीड़िता ने साफ किया कि वह अब पीछे हटने वाली नहीं हैं। “जब तक जमानत रद्द नहीं होती, हम चुप नहीं बैठेंगे। मुझे सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। जैसे ही कोर्ट खुलेगा, हम वहां आवेदन करेंगे।”

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