Bangladesh में भीड़तंत्र और हिंसा की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक संगठन के प्रवक्ता की मौत के बाद भड़की हिंसा के दौरान ढाका में दो प्रमुख अखबारों के दफ्तरों को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि मौके पर मौजूद पुलिस पर मूकदर्शक बने रहने के आरोप लगे।
करवान बाजार में मीडिया ऑफिस पर हमला
बीते गुरुवार को दंगाइयों ने ढाका के करवान बाजार इलाके में ‘प्रथम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ के दफ्तरों में तोड़फोड़ की और आगजनी की। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा कि आग लगती रही और पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया, जिससे प्रेस फ्रीडम को लेकर बहस तेज हो गई।
पुलिस ने क्यों नहीं की सख्त कार्रवाई?
आरोपों के बीच Dhaka Metropolitan Police के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि भीड़ हिंसा के दौरान सख्त कार्रवाई इसलिए नहीं की गई, क्योंकि पुलिसकर्मियों के निशाना बनने और गोलीबारी की आशंका थी।अधिकारी के अनुसार, यदि उस समय हस्तक्षेप किया जाता तो गोलीबारी हो सकती थी, जिससे कई लोगों की जान जा सकती थी और पुलिस पर भी हमले हो सकते थे।
“मानव जीवन बचाना प्राथमिकता”
पुलिस का कहना है कि हालात अत्यंत संवेदनशील थे और प्राथमिकता मानव जीवन की रक्षा थी। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद किसी की जान नहीं गई, जिसे वे अपनी उपलब्धि मानते हैं। पुलिस के अनुसार, बल पहले से ही चुनौतियों से गुजर रहा है और किसी भी अतिरिक्त हताहत का असर कानून-व्यवस्था पर पड़ सकता था।








