उत्तर प्रदेश के मथुरा में Yamuna Expressway पर 16 दिसंबर को हुए भयावह सड़क हादसे के बाद अब तक अधिकतर मृतकों की पहचान नहीं हो पाई है। इस दर्दनाक हादसे में डीएनए जांच अब मृतकों की शिनाख्त का एकमात्र निर्णायक जरिया बन गई है।
घने कोहरे में हुआ भीषण हादसा
घने कोहरे के बीच यमुना एक्सप्रेसवे पर आठ बसों समेत कई वाहन आपस में टकरा गए। टक्कर के बाद वाहनों में आग लग गई, जिससे दर्जनों यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
जले शव, पहचान लगभग असंभव
हादसे के बाद पोस्टमार्टम हाउस लाए गए अधिकांश शव बुरी तरह भस्म हो चुके थे। शवों की हालत इतनी खराब थी कि देखकर पहचान करना लगभग असंभव हो गया। ऐसे में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने शवों से डीएनए सैंपल लेकर वैज्ञानिक जांच का सहारा लिया है।
DNA जांच से ही खुलेगी पहचान की गुत्थी
विधि विज्ञान प्रयोगशाला में डीएनए जांच तेज़ी से की जा रही है। हादसे में मिले कंकाल, हड्डियां और दांत परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। हालांकि, आग की तीव्रता के कारण हड्डियां और दांत कोयले की तरह टूट चुके हैं, जिससे डीएनए निकालना बेहद जटिल प्रक्रिया बन गया है।वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि बोन मैरो या दांतों के पल्प से उपयोगी डीएनए प्राप्त हो पाता है, तभी मृतकों की पहचान संभव हो सकेगी।
परिजनों के DNA सैंपल लिए गए
अब तक करीब 15 परिवारों के डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं। परिजन लगातार प्रयोगशाला और प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। सभी की यही मांग है कि जल्द से जल्द पहचान सुनिश्चित हो, ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके।








